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बाजार में अब "दलित फूड्स",सेहत का दावा

Source : business.khaskhabar.com | July 01, 2016 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 now comes dalit foods in market 52250नई दिल्ली। दलित चिंतक चंद्रभान प्रसाद ने "दलित फूड्स" के नाम से खाद्य उत्पादों की एक सिरीज शुरू की है जिसके तहत आम का आचार, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मिर्च पाउडर जैसे उत्पाद ऑन लाइन बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

चंद्रभान के मुताबिक फिलहाल उनके उत्पाद ई-कॉमर्स के लिए उपलब्ध हैं, इसके लिए उन्होंने दलित फूड्स डॉट कॉम और दलितशॉप डॉटकॉम नाम से दो वेबसाइट शुरू की हैं। चंद्रभान प्रसाद ने कहा,अमरीकी यूनिवर्सिटी के एक शोध अध्ययन के दौरान मुझे 2008 में दलितों की बस्ती में रहने का मौका मिला जहां 90 साल और उससे भी ज्यादा उम्र के दलित मिले। ये अचरज भरा था क्योंकि दलितों की औसत उम्र आम भारतीयों से कम होती है फिर मैंने उन लोगों से बातचीत की। उनके खान-पान के बारे में जानने की कोशिश की।

दलितों के खान-पान के बारे में चंद्रभान प्रसाद बताते हैं, दरअसल दलितों का समाज गांव से बाहर होता था। उनके पास साधन नहीं थे, ऎसे में उन लोगों के 90-100 साल तक जीवित होने पर अचरज ही था लेकिन वे लोग बताते थे कि बाजरे की रोटी खाते थे, ज्वार खाते थे। जब गेहूं की रोटी पहली बार उन लोगों ने खाई तो उनका पेट खराब हो गया। ऎसे लोगों से बातचीत के करीब आठ साल बाद चंद्रभान प्रसाद ने पांच लाख रूपये के निवेश के साथ दलित फूड्स नामक ब्राण्ड की शुरूआत की है।

दलित नाम के ठप्पे के साथ इन उत्पादों को भारतीय बाजार में बेचना कितना कारगर होगा, के सवाल पर चंद्रभान प्रसाद कहते हैं,जो आजकल हेल्दी डायट है, वो एक-दो पीढी पहले तक दलितों का मुख्य भोजन हुआ करता था। आज डायबिटीज और ह्वदय रोग के मरीज,जो जौ और बाजरा खा रहे हैं, वही दलितों का मुख्य भोजन था। लेकिन क्या इसको सामाजिक मान्यता मिल पाएगी, इस बारे में चंद्रभान कहते हैं,हमारा उद्देश्य शहर के उन लोगों तक पहुंचना है, जो दलितों का उत्थान चाहते हैंइन उत्पादों को भारतीय बाजार में बेचना उनके हुनर और काम को बढाना चाहते हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ का साथ मिला...

चंद्रभान प्रसाद की इस कोशिश को भारतीय उद्योग परिसंघ (कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज) का साथ मिला है। चंद्रभान प्रसाद के दलित फूड्स साइट पर वही उत्पाद मिलेंगे जो उनके यूनिट में तैयार हो रहे हैं वहीं दलित शॉप में कोई भी दूसरा दलित अपना उत्पाद बेच सकता है यानी एक तरह से दलितों को ई-कॉमर्स की दुनिया में एक तरह का मंच मिलेगा। चंद्रभान प्रसाद बताते हैं, हमने खास हल्दी का इस्तेमाल किया है जो महाराष्ट्र के सूखे से प्रभावित इलाके वर्धा के दलित किसान के खेत में पैदा हुई है, धनिया बुंदेलखंड से मंगाया है,लाल मिर्च हम राजस्थान के मथानिया से मंगा रहे हैं।

बाबा रामदेव गोबर का आइसक्रीम भी बेचें तो...

इस सवाल पर कि इस तरह के उत्पाद तो योगगुरू बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर भी बना रहे हैं, चंद्रभान प्रसाद ने कहा,इन लोगों का बडा कारोबार है, बाबा रामदेव की छवि ऎसी है कि वे गोबर का आइसक्रीम भी बेचेंगे तो वो बिक जाएगा। चंद्रभान प्रसाद कहते हैं, हमने जो आचार बनाया है उसमें एसिड का कोई इस्तेमाल नहीं किया है। हमने उन लोगों का ध्यान रखा है जो केवल मोटी रोटी और आचार के साथ खाना खाते हैं।

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