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सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने मुनाफाखोरी नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की सेवा की : आंकड़े

Source : business.khaskhabar.com | May 28, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 state run oil marketing companies did not profiteer but served consumer interests data 816841नई दिल्ली । देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के मुनाफे को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच नए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ओएमसी का कुल संयुक्त मुनाफा 77,821 करोड़ रुपए रहा, लेकिन इसे 'बंपर कमाई' या 'विंडफॉल प्रॉफिट' कहना पूरी तस्वीर को नहीं दिखाता। 
विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि पश्चिम एशिया संकट और ईंधन कीमतों के बीच ओएमसी के मुनाफे में 130 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि यह बढ़ोतरी एक असामान्य रूप से कमजोर पिछले वित्त वर्ष की तुलना में दिखाई दे रही है।
दरअसल, वित्त वर्ष 2024-25 में ओएमसी का मुनाफा केवल 33,602 करोड़ रुपए था, जो उससे पिछले वर्ष 2023-24 के मुकाबले 47,384 करोड़ रुपए कम था। इसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू एलपीजी पर 40,434 करोड़ रुपए की अंडर-रिकवरी थी, जिसे तेल कंपनियों ने खुद वहन किया था। बाद में केंद्र सरकार ने इस नुकसान की भरपाई कर दी।
अगर तुलना सामान्य वर्षों से की जाए, तो 2025-26 का 77,821 करोड़ रुपए का मुनाफा 2023-24 के 80,986 करोड़ रुपए के लगभग बराबर ही है। यानी 130 प्रतिशत की बढ़ोतरी वास्तव में पिछले साल हुए नुकसान से उबरने का असर है, न कि अचानक हुई भारी कमाई।
आंकड़ों के मुताबिक, तीनों सरकारी ओएमसी का कुल कारोबार करीब 20 लाख करोड़ रुपए के आसपास है। ऐसे में 77,821 करोड़ रुपए का मुनाफा कुल कारोबार का सिर्फ 3 से 4 प्रतिशत मार्जिन बनता है, जिसे इस स्तर की किसी भी बड़ी कमोडिटी रिफाइनिंग कंपनी के लिए सामान्य 'वर्किंग मार्जिन' माना जाता है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) अकेले लगभग 10 लाख करोड़ रुपए का सालाना कारोबार करती है और उसका सामान्य मुनाफा 20,000 से 30,000 करोड़ रुपए के बीच रहता है। यानी उसका लाभ मार्जिन करीब 3 प्रतिशत होता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस मुनाफे का लगभग आधा हिस्सा डिविडेंड के रूप में भारत सरकार को वापस चला जाता है, जिसका इस्तेमाल सड़क, हाईवे, रेलवे और अन्य सार्वजनिक निवेश परियोजनाओं में किया जाता है। बाकी राशि रिफाइनरी विस्तार और बड़े पूंजीगत निवेश प्रोजेक्ट्स में लगाई जाती है, जहां एक बड़े रिफाइनरी विस्तार कार्यक्रम की लागत ही 50,000 से 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है।
सरकार पहले ही 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर घटा चुकी है। इसके बावजूद पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद भारत में खुदरा ईंधन कीमतों में सिर्फ 8 से 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि पड़ोसी देशों में यह बढ़ोतरी 20 से 67 प्रतिशत तक रही।
--आईएएनएस
 

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