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सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की नई रणनीति, 'मेक इन इंडिया' से आगे बढ़कर 'इंजीनियर इन इंडिया' की ओर कदम

Source : business.khaskhabar.com | Sep 07, 2026 | businesskhaskhabar.com Gadget News Rss Feeds
 india new semiconductor strategy moving beyond make in india to engineer in india 842626नई दिल्ली । एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने और वैश्विक चिप विनिर्माण एवं डिजाइन केंद्र बनने की दिशा में अपने प्रयासों को तेज कर रहा है। इसी उद्देश्य से सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण (सेमीकॉन 2.0) की शुरुआत की है, जिसके लिए लगभग 13 अरब डॉलर (करीब 1.27 लाख करोड़ रुपए) का प्रावधान किया गया है। नई रणनीति का लक्ष्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को विकसित करना और कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी है। 
'दिस वीक इन एशिया' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब बुनियादी विनिर्माण अवसंरचना से आगे बढ़कर डिजाइन, इंजीनियरिंग, परीक्षण, पैकेजिंग और आपूर्ति शृंखला विकास जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। सरकार का मानना है कि देश की बड़ी इंजीनियरिंग प्रतिभा और तकनीकी कौशल भारत को केवल "मेक इन इंडिया" नहीं बल्कि "इंजीनियर इन इंडिया" के रूप में स्थापित कर सकते हैं।
सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित प्रणालियां, डेटा सेंटर, चिकित्सा उपकरण और उन्नत कंप्यूटिंग तकनीकों से लेकर लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद में चिप्स की अहम भूमिका होती है। कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आए व्यवधानों ने यह भी दिखाया कि कुछ सीमित पूर्वी एशियाई देशों पर अत्यधिक निर्भरता कितनी जोखिमपूर्ण हो सकती है। इसी अनुभव के बाद भारत ने घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमताओं के निर्माण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कार्यबल है। यही कारण है कि उद्योग जगत का एक वर्ग मानता है कि भारत केवल चिप निर्माण तक सीमित न रहकर सेमीकंडक्टर डिजाइन और इंजीनियरिंग में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है। यह क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक मूल्यवर्धन वाला है और भारत की मौजूदा प्रतिभा क्षमता के अनुरूप भी है।
अब तक भारत ने छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से माइक्रोन, केनेस सेमीकॉन और सीजी सेमी ने इस वर्ष वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। हालांकि इनकी प्रमुख गतिविधियां फिलहाल असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग तक केंद्रित हैं, लेकिन इन्हें देश में व्यापक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की शुरुआत माना जा रहा है।
इस बीच गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन की संयुक्त परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इस परियोजना से दिसंबर में चिप्स का पहला बैच निकलने की उम्मीद है। यह संयंत्र भारत की चिप निर्माण क्षमता को मजबूत करने और घरेलू आपूर्ति शृंखला विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने हाल ही में नीदरलैंड की अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनी एएसएमएल के साथ 11 अरब डॉलर के समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के विकास में सहयोग करना है, जिससे ऑटोमोबाइल, एआई, औद्योगिक स्वचालन और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों की चिप आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
 

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