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आरबीआई ने एफसीएनआर(बी) संबंधी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों को लेकर जारी किया प्रश्नोत्तर, विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा को लेकर दिए अहम दिशा-निर्देश

Source : business.khaskhabar.com | Jun 24, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 rbi issues faqs on fcnr(b) and key guidelines for foreign currency swap facility 823688नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में घोषित एफसीएनआर(बी) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) जमा योजना और विशेष स्वैप सुविधा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि भारतीय बैंक एनआरआई ग्राहकों को उनकी एफसीएनआर(बी) जमा राशि के बदले लोन दे सकेंगे। साथ ही बैंकों को ऐसे ऋणों के लिए संबंधित जमा पर लियन लगाने की अनुमति भी होगी। 
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा के तहत वह केवल एफसीएनआर(बी) जमा की मूल राशि पर ही हेजिंग लागत वहन करेगा। जमा पर मिलने वाले ब्याज को इस सुविधा के दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा। इससे बैंकों को इस योजना के तहत जुटाई गई जमा राशि की सही कीमत तय करने में मदद मिलेगी।
दरअसल, 5 जून 2026 को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी। इसी के तहत एफसीएनआर(बी) जमा, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा उधारी के लिए विशेष स्वैप सुविधा शुरू की गई।
इस योजना के तहत 30 सितंबर 2026 तक बैंकों द्वारा जुटाई गई तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली नई एफसीएनआर(बी) जमा पर हेजिंग की पूरी लागत आरबीआई वहन करेगा, जिसका उद्देश्य बैंकों को अधिक विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
आरबीआई द्वारा जारी एफएक्यू के अनुसार, भारतीय बैंक और उनकी विदेशी शाखाएं एफसीएनआर(बी) जमा रखने वाले एनआरआई ग्राहकों को ऋण प्रदान कर सकती हैं। इसके अलावा बैंक विदेशी ऋणदाताओं के पक्ष में स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) भी जारी कर सकते हैं।
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंक एफसीएनआर(बी) खाते के धारक को विदेश में भी लोन दे सकते हैं और सुरक्षा के तौर पर संबंधित जमा राशि पर लियन भी लगा सकते हैं।
आरबीआई ने कहा कि विशेष स्वैप सुविधा के तहत केवल जमा की मूल राशि को ही कवर किया जाएगा। जमा पर मिलने वाले ब्याज को इस सुविधा में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी बैंकों को ब्याज राशि के लिए अलग से प्रबंधन करना होगा।
हालांकि, यदि किसी एफसीएनआर(बी) जमा की मूल अवधि तीन वर्ष या उससे अधिक रही है और स्वैप सुविधा लेने के समय उसकी शेष अवधि तीन वर्ष से कम बची हो, तब भी बैंक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
आरबीआई ने बैंकों को एफसीएनआर(बी) जमा पर अलग-अलग ब्याज दरें देने की अनुमति भी दी है। हालांकि, यह ब्याज दरें जमा की अवधि और राशि के आधार पर ही तय की जा सकेंगी। इसके लिए रिजर्व बैंक के जमा ब्याज दर संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक स्वैप सुविधा का उपयोग किए बिना भी सामान्य एफसीएनआर(बी) जमा योजनाएं जारी रख सकते हैं। हालांकि, ऐसी जमा राशियों का रिकॉर्ड अलग से रखना होगा।
आरबीआई ने बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट किया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, कंपनियां नियमों के तहत किसी भी अवधि के लिए ईसीबी जुटा सकती हैं। हालांकि, विशेष स्वैप सुविधा का लाभ केवल उन ईसीबी पर मिलेगा जिनकी औसत परिपक्वता अवधि कम से कम तीन वर्ष हो।
इसके अलावा, स्वैप की अवधि ईसीबी की पुनर्भुगतान अवधि के अनुरूप होगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा पांच वर्ष तक ही रहेगी।
विदेशी मुद्रा जमा को और आकर्षक बनाने के लिए आरबीआई ने नई एफसीएनआर(बी) और एनआरई जमा राशियों को कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) और वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) जैसी अनिवार्य आरक्षित आवश्यकताओं से भी छूट दी है। इससे बैंकों के लिए एनआरआई जमा जुटाना अधिक लाभकारी होगा और वे ग्राहकों को बेहतर ब्याज दरें भी दे सकेंगे।
--आईएएनएस 

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