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आरबीआई के कदमों से वित्त वर्ष 27 में करीब 75 अरब डॉलर रह सकता है भारत का भुगतान संतुलन : बैंक ऑफ बड़ौदा

Source : business.khaskhabar.com | Sep 04, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india balance of payments could stand at around $75 billion in fy27 due to rbi measures bank of baroda 842044नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों के चलते वित्त वर्ष 27 में भारत का भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) अधिशेष 65-75 अरब डॉलर के बीच रह सकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।  
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया कि सर्विस निर्यात और रेमिटेंस में मजबूती के चलते चालू खाता घाटा जीडीपी का 1-1.25 प्रतिशत के बीच रह सकता है।
इसके अलावा, आरबीआई की ओर से विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के लिए शुरू की गई स्कीमों के तहत 136.4 अरब डॉलर का इनफ्लो आने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू मुद्रा के अवमूल्यन को रोकने में मजबूती मिली है।
रिपोर्ट में कहा गया, "अर्थव्यवस्था का भविष्य अच्छा दिख रहा है। भले ही मध्य पूर्व के हालात को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन भारत अब बाहरी झटकों का सामना करने के लिए मजबूत स्थिति में है।"
भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति में 47.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिससे कुल विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
आरबीआई द्वारा डॉलर आकर्षित करने के लिए जून में शुरू की गई स्कीमों के तहत विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा के जरिए लगभग 127.2 अरब डॉलर जुटाए गए, जो कुल इनफ्लो का 90 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, विदेशी मुद्रा में विदेशी कर्ज (ओएफसीबी) के जरिए 5.3 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्य उधारी (ईसीबी) के जरिए 3.9 अरब डॉलर जुटाए गए।
कई बैंकों ने 3-5 साल की एफसीएनआर (बी) जमा राशि पर ब्याज दरें लगभग 2-4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6-7 प्रतिशत कर दीं, जिससे ये जमा राशि एनआरआई के लिए ज्यादा आकर्षक हो गईं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि आरबीआई अतिरिक्त लिक्विडिटी को सक्रिय रूप से सोख रहा है, क्योंकि उसने 6 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुल 53.5 लाख करोड़ रुपए के वीआरआरआर नीलामी की घोषणा की है।
सरकार और आरबीआई ने इन उपायों की घोषणा इनफ्लो को बढ़ाने के लिए की है, क्योंकि यूएस-ईरान युद्ध ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा कर दी थीं। तेल की बढ़ती कीमतों और लगातार एफपीआई आउटफ्लो के कारण बाहरी स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। इससे डॉलर के मुकाबले रुपए पर दबाव देखा जा रहा था।
--आईएएनएस
 

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