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सेबी ने आईपीओ और री-लिस्टिंग के प्राइस डिस्कवरी सिस्टम में बड़े बदलाव का दिया प्रस्ताव 

Source : business.khaskhabar.com | May 22, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 sebi proposes major changes to price discovery system for ipos and re listings 815379नई दिल्ली । सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) ने गुरुवार को जारी एक परामर्श पत्र में आईपीओ लिस्टिंग और री-लिस्टिंग के दौरान शेयरों की कीमत तय करने की प्रक्रिया में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। 
बाजार नियामक ने कहा कि मौजूदा प्राइस डिस्कवरी सिस्टम कृत्रिम रूप से शेयर कीमतों को दबा रहा है, जिसके चलते ट्रेडिंग शुरू होने के बाद लगातार अपर सर्किट लग रहे हैं।
सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि जब निवेशकों की मजबूत मांग दिखाई दे, तब प्राइस बैंड को अपने आप और तेजी से बढ़ाया जाए, ताकि एक्सचेंजों को बार-बार मैन्युअल हस्तक्षेप न करना पड़े।
बयान में कहा गया, "डमी प्राइस बैंड को बढ़ाने का सिस्टम सभी एक्सचेंजों में एक जैसा होना चाहिए और जरूरत पड़ने पर प्राइस बैंड तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए।"
सेबी ने कहा कि एक्सचेंजों को पहले से तय नियमों और अन्य एक्सचेंजों से सलाह के आधार पर 10 प्रतिशत के गुणकों में डमी प्राइस बैंड को अपने आप बढ़ाना चाहिए।
नियामक ने यह भी कहा कि यह व्यवस्था सुबह 9:35 बजे से 9:45 बजे तक के रैंडम क्लोजर पीरियड के दौरान भी लागू रहनी चाहिए।
सेबी के मुताबिक, मौजूदा नियमों के कारण प्री-ओपन ऑक्शन सत्र में बड़ी संख्या में वास्तविक खरीद ऑर्डर रिजेक्ट हो रहे हैं, जिससे बाजार सही ओपनिंग प्राइस तय नहीं कर पा रहा है।
सेबी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक री-लिस्टेड शेयर में करीब 90 प्रतिशत खरीद ऑर्डर रिजेक्ट हो गए, क्योंकि बोली एक्सचेंज द्वारा तय सीमा से बाहर थी।
सेबी ने री-लिस्टेड कंपनियों के शुरुआती शेयर मूल्य तय करने की प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत पुराने या कृत्रिम रूप से कम रेफरेंस प्राइस की बजाय हालिया बाजार कीमतों या स्वतंत्र वैल्यूएशन रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।
सेबी ने कहा, "कॉल ऑक्शन सत्र को तभी सफल माना जाएगा, जब प्राइस डिस्कवरी कम से कम 5 अलग-अलग पैन आधारित खरीदारों और विक्रेताओं के ऑर्डर पर आधारित हो।"
फिलहाल एसएमई आईपीओ के कॉल ऑक्शन सत्र में कोई प्राइस बैंड नहीं होता, लेकिन एसएमई शेयरों में ज्यादा उतार-चढ़ाव को देखते हुए स्टॉक एक्सचेंजों ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्राइस बैंड तय कर रखा है, जिसमें कोई फ्लेक्सिंग मानदंड नहीं है।
--आईएएनएस
 

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