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रोबोटिक्स और एआई बदलेंगे भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था, सर्जरी से आगे बढ़कर निदान और उपचार में बढ़ेगी भूमिका: डॉ. जितेंद्र सिंह

Source : business.khaskhabar.com | Oct 03, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 robotics and ai will transform indias healthcare system expanding beyond surgery to diagnostics and treatment dr jitendra singh 849982
नई दिल्ली । केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का अगला चरण रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नैनोसाइंस से संचालित होगा। उन्होंने कहा कि रोबोटिक्स अब केवल सर्जरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में निदान, उपचार और थेरेपी सहित चिकित्सा के लगभग हर क्षेत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। 
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी (एसआरएस इंडिया 2026) के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि रोबोटिक्स, एआई और नैनो टेक्नोलॉजी मिलकर एक ऐसा एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेंगे जो मरीजों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप उपचार प्रदान करने में सक्षम होगा।
खुद एक चिकित्सक और डायबेटोलॉजिस्ट रहे डॉ. सिंह ने कहा कि रोबोटिक्स को केवल सर्जिकल तकनीक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वर्तमान में रोबोटिक सर्जरी इसका सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला उपयोग है, लेकिन आने वाले समय में रोबोटिक मेडिसिन, रोबोटिक एंडोक्राइनोलॉजी और रोबोटिक कार्डियोलॉजी जैसे नए क्षेत्र विकसित हो सकते हैं। उन्होंने इसकी तुलना एआई से करते हुए कहा कि जैसे एआई आज चिकित्सा की अनेक विशेषज्ञताओं में उपयोग हो रही है, वैसे ही रोबोटिक्स का दायरा भी तेजी से बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया अब फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज के युग में प्रवेश कर रही है, जहां एआई, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, नैनोटेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव ला रहे हैं। भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था आनुवंशिक जानकारी पर आधारित निदान और व्यक्तिगत उपचार पद्धतियों पर अधिक निर्भर होगी।
डॉ. सिंह ने आगे कहा कि एक ही बीमारी से पीड़ित दो मरीजों के लिए उपचार का तरीका अलग हो सकता है, क्योंकि उनका जीन प्रोफाइल, जीवनशैली, खानपान और पर्यावरणीय परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। प्रिसिजन मेडिसिन की अवधारणा इसी व्यक्तिगत अंतर को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है।
उन्होंने जीनोम इंडिया कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल के तहत अब तक 10,000 लोगों का जीन अनुक्रमण किया जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भारत हर नवजात शिशु का जीन अनुक्रमण करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
मंत्री ने कहा कि 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले देश में इतने बड़े स्तर के आनुवंशिक आंकड़ों का विश्लेषण और प्रबंधन केवल एआई और रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों की मदद से ही संभव होगा। इससे रोगों की प्रारंभिक पहचान, जोखिम मूल्यांकन और व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों को विकसित करने में सहायता मिलेगी।
डॉ. सिंह ने नैनोमेडिसिन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की कई पुरानी चुनौतियों का समाधान नैनो तकनीक के माध्यम से संभव हो सकता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ओरल इंसुलिन विकसित करने के प्रयास जारी हैं और नैनो-स्तर की तकनीकें दवाओं की डिलीवरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नैनो तकनीक-आधारित नवाचार न केवल दवाओं के प्रभाव को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि बीमारी प्रबंधन और उपचार के नए रास्ते भी खोल सकते हैं।
--आईएएनएस
 

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