देशी घी में उबाल: 15 दिन में ₹15 प्रति किलो की तेजी, दक्षिण भारत में दूध संकट से गाय का घी ₹725 के पार
Source : business.khaskhabar.com | Sep 30, 2026 | 

बिजनेस डेस्क। जयपुर त्योहारी मांग और आगामी वैवाहिक सीजन के दबाव के बीच डेयरी व खाद्य तेल-तिलहन बाजार में देशी घी के भावों में जोरदार तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले दो सप्ताह के दौरान देशी घी की कीमतों में ₹15 प्रति किलोग्राम का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। डेयरियों के पास तैयार स्टॉक नगण्य होने और कच्चे दूध की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी के चलते बाजार में मंदी की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो गई हैं।
स्थानीय थोक कृषि उपज मंडी कूकरखेड़ा स्थित ब्रोकरेज फर्म आर. मूंदड़ा एंड कंपनी के विशेषज्ञ रामनिवास मूंदड़ा के अनुसार, चालू त्योहारी सीजन और इसके तुरंत बाद शुरू होने वाले वैवाहिक आयोजनों के चलते देशी घी की थोक व खुदरा मांग अपने चरम पर पहुंच रही है। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के राज्यों में दूध उत्पादन में आई गिरावट ने घी की आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।
दक्षिण में दूध की किल्लत का सीधा असर गाय के घी की कीमतों पर पड़ा है, जिसमें ₹30 प्रति किलोग्राम तक की तेजी आई है। इसके परिणामस्वरूप सोनई और तिरूमाला जैसे प्रमुख ब्रांड्स के गाय के घी के थोक भाव उछलकर ₹725 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए हैं।
घरेलू खपत और उत्पादन चक्र का दबाव
व्यापारिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार में देशी घी और मक्खन (बटर) का उपभोग ढांचा बेहद मजबूत है।
आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल घी उत्पादन का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष रूप से घरेलू उपभोग (हाउसहोल्ड कंजम्पशन) में खपता है। सर्दियों और त्योहारी महीनों के दौरान मिठाई, बेकरी और पारंपरिक खानपान के कारण घी निर्माताओं द्वारा बटर का बड़ा इन्वेंटरी स्टॉक तेजी से खपाया जाता है, जिसके कारण गर्मियों के महीनों तक आते-आते कैर्री-फॉरवर्ड स्टॉक काफी नीचे आ जाता है।
हालांकि देश में कुल बटर का उत्पादन बढ़कर लगभग 7.44 लाख टन होने का अनुमान है, लेकिन मौजूदा आपूर्ति असंतुलन और उच्च लागत के चलते अल्पकाल में कीमतों में नरमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
[@ इस दिशा में हो मंदिर, तो घर में होती है कलह]
[@ कोमा से बाहर आते ही बोलने लगा दूसरे देश की भाषा]
[@ फिल्म इंडस्ट्री में सेक्स रैकेट का धंधा पांव पसारता जा रहा है,फंसी ये 11 एक्ट्रेस]