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चीन पर अमेरिकी दवा उद्योग की बढ़ती निर्भरता से सप्लाई संकट का खतरा: रिपोर्ट

Source : business.khaskhabar.com | May 16, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 risk of supply crisis due to us pharmaceutical industrys growing reliance on china report 814050नई दिल्ली । अमेरिका का फार्मास्युटिकल और बायोटेक सेक्टर चीनी सप्लाई चेन पर बेहद ज्यादा निर्भर हो गया है, जिससे वह आपूर्ति बाधित होने के बड़े खतरे का सामना कर रहा है। एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है।
 
अमेरिका की ऑनलाइन पत्रिका ‘द नेशनल इंटरेस्ट’ में प्रकाशित एक लेख में ब्लड थिनर दवा ‘हेपारिन’ का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि अमेरिकी मरीजों की इस दवा के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भरता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली हेपारिन की करीब 70 प्रतिशत सप्लाई चीन से आती है। अमेरिका में हेपारिन एपीआई बनाने वाले दो प्लांट- विस्कॉन्सिन स्थित एसपीएल और ओहायो स्थित स्मिथफील्ड बायोसाइंस अब चीनी कंपनियों की सहायक इकाइयां बन चुके हैं। लेख में कहा गया है कि अमेरिका के पास इस दवा का कोई स्वतंत्र, व्यावसायिक स्तर का घरेलू उत्पादक नहीं बचा है।
रिपोर्ट में 2007-08 की उस घटना का भी जिक्र किया गया है, जब चीन से आई दूषित हेपारिन के कारण कम से कम 149 अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई थी। यह दूषित सप्लाई 11 देशों तक पहुंची थी। जांच में इसका स्रोत चीन के जियांग्सू प्रांत के चांगझोउ शहर को बताया गया, लेकिन चीनी अधिकारियों ने इस दावे से इनकार किया और अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को आपराधिक जांच की अनुमति नहीं दी। मामले में किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।
लेख में कहा गया है कि 2008 की इस त्रासदी के बावजूद अमेरिका ने अपनी निर्भरता कम करने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। उल्टा, अमेरिकी कंपनियां इस दवा के उत्पादन से बाहर हो रही हैं, जिससे चीन पर निर्भरता और बढ़ती जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, “उत्पादन के स्रोत बढ़ने के बजाय घट रहे हैं। हर नई बंदी के साथ चीनी एपीआई उत्पादकों का दबदबा और मजबूत होता जा रहा है तथा अमेरिकी मरीजों का इलाज ऐसी सप्लाई चेन पर निर्भर होता जा रहा है, जिस पर वॉशिंगटन का नियंत्रण नहीं है।”
लेख में ‘रोडियम ग्रुप’ की मई 2026 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि चीन अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत वैश्विक सप्लाई चेन पर पकड़ मजबूत करने में जुटा है। 2021 से 2024 के बीच ऐसे उत्पादों की संख्या 192 से बढ़कर 315 हो गई है, जिनमें चीन का दबदबा बहुत अधिक है।
मार्च 2026 में जारी चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना में बायोमैन्युफैक्चरिंग को उन क्षेत्रों में शामिल किया गया है, जहां “निर्णायक सफलता” हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मतलब है कि चीन फार्मास्युटिकल वैल्यू चेन में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन पहले ही रेयर अर्थ और उर्वरक क्षेत्रों में अपनी मजबूत स्थिति का इस्तेमाल व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बनाने के लिए कर चुका है, जिससे कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई।
लेख के अनुसार, यदि उत्पादन गुणवत्ता में कोई बड़ी गड़बड़ी होती है या अमेरिका-चीन के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ता है, तो चीन हेपारिन की सप्लाई रोक सकता है, जिसका सबसे गंभीर असर डायलिसिस मरीजों पर पड़ेगा।
रिपोर्ट में अगस्त 2025 में जारी उस अमेरिकी कार्यकारी आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत ‘स्ट्रैटेजिक एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स रिजर्व’ (एसएपीआईआर) बनाने की योजना शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य करीब दो दर्जन जरूरी दवाओं के लिए छह महीने का एपीआई भंडार तैयार करना है, जिसमें घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि, लेख में कहा गया है कि अमेरिकी सरकार की प्रमुख ‘फ्लो-बार्डा’ पहल मुख्य रूप से कंटीन्यूअस-फ्लो केमिस्ट्री तकनीक पर आधारित है, जो छोटी रासायनिक दवाओं के लिए उपयुक्त है, लेकिन पशु ऊतकों से बनने वाली जैविक दवा हेपारिन का उत्पादन इससे संभव नहीं है।
--आईएएनएस 

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