उत्पादन में गिरावट और सीमित आवक से चने के दामों में उछाल, जल्द 7000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुँचने के आसार
Source : business.khaskhabar.com | Aug 05, 2026 | 

बिजनेस डेस्क। जयपुर देश में इस साल चने की पैदावार में दर्ज की गई बड़ी गिरावट और आयात में आ रही व्यावहारिक अड़चनों (बेपड़ता आयात) के कारण चने के बाजार में लगातार तेजी का माहौल बना हुआ है। गुलाबी नगरी जयपुर की कृषि उपज मंडी में बुधवार को मिल डिलीवरी देशी चने के भाव मजबूती दर्शाते हुए 6400 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुँच गए।
चांदपोल मंडी स्थित त्रिवेणी ब्रोकर्स के कारोबारी कैलाश चंद शर्मा के अनुसार वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान देश भर में चने का कुल उत्पादन घटकर महज 90 लाख टन के आसपास ही सिमट कर रह गया है, जबकि देश की वार्षिक घरेलू खपत लगभग 130 लाख टन दर्ज की जाती है। आपूर्ति और माँग के बीच बने इस 40 लाख टन के बड़े अंतर की भरपाई के लिए कारोबारी ऑस्ट्रेलिया से आने वाली चने की नई खेप पर निर्भर हैं, जिसकी डिलीवरी नवंबर माह तक होने की संभावना जताई जा रही है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक चने का चालू फसल सीजन बीते फरवरी महीने से जारी था, जिसके तहत मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाद अब राजस्थान की मंडियों में भी नई आवक का दौर पूरी तरह समाप्त हो चुका है। प्रतिकूल मौसम और बेमौसम परिस्थितियों के कारण इस बार फसल को भारी नुकसान पहुँचा, जिसके चलते सीजन के दौरान किसी भी प्रमुख मंडी में आवक का दबाव देखने को नहीं मिला। इसके अतिरिक्त अब तक सरकारी एजेंसी नैफेड (NAFED) द्वारा टेंडरों के जरिए चने की बिकवाली कर बाजार को संतुलित करने का प्रयास किया जा रहा था, परंतु अब नैफेड का चना भी लागत पड़ते में न बैठने के कारण बिकवाली के दायरे से बाहर हो गया है।
आपूर्ति में कमी की आशंका को देखते हुए स्टॉकिस्टों ने भी अपनी होल्डिंग बढ़ा दी है और माल को रोक लिया है। दिल्ली समेत देश की तमाम बड़ी खाद्यान्न मंडियों में चने का बफर स्टॉक बेहद निचले स्तर पर आ पहुँचा है। मंडी के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि आने वाले दिनों में चने की कीमतों को और पंख लग सकते हैं तथा आपूर्ति में सुधार न होने की स्थिति में भाव जल्द ही 7000 रुपये प्रति क्विंटल के नए रिकॉर्ड स्तर को छू सकते हैं।
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