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एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम

Source : business.khaskhabar.com | Sep 22, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 next phase of fdi should focus on a robust industrial ecosystem not just investment assocham 846607नई दिल्ली । उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके। 
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।
अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।
एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।
रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।
--आईएएनएस
 

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