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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से खुलेगा 20 अरब डॉलर निवेश का रास्ता, कृषि से स्टार्टअप तक कई क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

Source : business.khaskhabar.com | Sep 22, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india new zealand fta to pave way for 20 billion investment sectors from agriculture to startups set to benefit 846609नई दिल्ली । भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर से लागू होने जा रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे कृषि, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। 
मंत्रालय ने कहा कि भारत के तेजी से बढ़ रहे सेवा क्षेत्र के लिए भी यह समझौता नए अवसर लेकर आएगा। इसके तहत भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को न्यूजीलैंड के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। यह समझौता आईटी, पेशेवर सेवाएं, ऑडियो-विजुअल, निर्माण और पर्यटन समेत लगभग 118 क्षेत्रों को कवर करता है। साथ ही करीब 139 उप-क्षेत्रों में 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (एमएफएन) का दर्जा भी सुनिश्चित किया गया है।
समझौते के तहत कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए हर वर्ष 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा और युवाओं के लिए 1,000 वर्किंग हॉलीडे वीजा का विशेष प्रावधान किया गया है।
छात्रों को भी इससे बड़ा लाभ मिलेगा। समझौते के तहत छात्र गतिशीलता पर कोई सीमा नहीं होगी और एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) विषयों के स्नातकों को पढ़ाई पूरी करने के बाद तीन वर्ष तक कार्य करने का अधिकार मिलेगा। वहीं डॉक्टरेट शोधार्थियों को चार वर्ष तक काम करने की अनुमति दी जाएगी।
भारतीय फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस निर्यातकों को भी इससे फायदा होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड अब अमेरिकी एफडीए, यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (ईएमए), ब्रिटेन की एमएचआरए और हेल्थ कनाडा जैसे प्रतिष्ठित नियामकों की निरीक्षण स्वीकृतियों को स्वीकार करेगा, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान और तेज होगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 1.1 अरब डॉलर रहा है। सरकार का मानना है कि एफटीए लागू होने के बाद व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। डेयरी उत्पाद, पशु मांस (भेड़ को छोड़कर), प्रमुख कृषि उत्पाद, चीनी और खाद्य तेल जैसे संवेदनशील उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है।
वहीं न्यूजीलैंड के सेब, कीवीफ्रूट और शहद के लिए सीमित बाजार पहुंच का प्रावधान किया गया है। इसके लिए टैरिफ रेट कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी आयात व्यवस्था लागू होगी, ताकि घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रहें।
समझौते के तहत कृषि उत्पादकता साझेदारी की भी स्थापना की जाएगी, जिसके अंतर्गत कीवीफ्रूट, सेब और शहद उत्पादन के लिए विशेष कार्ययोजनाएं बनाई जाएंगी, जिनका उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
इसके अलावा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जहां बागवानी प्रबंधन, फसल कटाई के बाद की तकनीक, आपूर्ति शृंखला, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में सहयोग और प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद भी बनाई जाएगी, जो इस सहयोग कार्यक्रम की निगरानी करेगी।
मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, कौशल, शिक्षा, कृषि तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा कर भारत-न्यूजीलैंड आर्थिक साझेदारी को एक नए स्तर पर पहुंचाएगा।
--आईएएनएस
 

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