कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के चलते बाजार दबाव में, सेंसेक्स-निफ्टी में 0.34 प्रतिशत तक की गिरावट
Source : business.khaskhabar.com | Aug 12, 2026 | 

मुंबई । भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख बेंचमार्क सपाट खुले।
इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,154.25 से 0.13 प्रतिशत यानी 109.08 अंक बढ़कर 78,263.33 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,471.70 से 0.75 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,472.45 पर फ्लैट खुला।
हालांकि बाद के कारोबार में दोनों प्रमुख बेंचमार्कों में गिरावट दर्ज की गई, और खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 131 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 78,040 के स्तर पर था, जबकि निफ्टी 0.15 प्रतिशत फिसलकर 24,435 पर ट्रेड कर रहा था।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स 273 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 77,881 के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 81 अंक यानी 0.33 प्रतिशत टूटकर 24,390 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। लगातार बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.09 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.07 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.86 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक 0.60 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.23 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
दूसरी ओर, रक्षात्मक और उपभोक्ता आधारित क्षेत्रों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 0.64 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.58 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.41 प्रतिशत तक फिसल गया। वहीं निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी50 इंडेक्स में मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट, अपोलो हॉस्पिटल, बजाज फिनसर्व, टाटा कंज्यूमर, डॉ. रेड्डीज और टाइटन के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। उनका कहना है कि बाजार में तेजी की संभावना होने के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतें प्रमुख बाधा बनी हुई हैं।
विश्लेषकों ने कहा, "बाजार लगातार ऊपरी स्तरों को तोड़ने में असफल हो रहा है और सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी है, जो फिर से 89 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है।"
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समय-समय पर बढ़ते तनाव भी निवेशकों की चिंता का कारण बने हुए हैं। हाल ही में अमेरिकी सेना द्वारा पनामा-ध्वज वाले एक कंटेनर जहाज पर कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर ईरान के कड़े रुख ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। यदि यह तनाव बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है।
हालांकि कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आशावाद बना हुआ है। हाल ही में जारी एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान 6.7 प्रतिशत है।
बाजार जानकारों का कहना है कि यदि अर्थव्यवस्था वास्तव में 8 प्रतिशत की दर से बढ़ती है, तो कंपनियों की आय में अपेक्षा से अधिक सुधार देखने को मिल सकता है, जो शेयर बाजार के लिए एक मजबूत सकारात्मक कारक होगा।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी तेजी का माहौल बना रहा। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 89.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.14 प्रतिशत चढ़कर 84.14 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
वहीं, एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। जापान का निक्केई इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 1 प्रतिशत गिर गया। वहीं दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4 प्रतिशत से अधिक उछाल के साथ प्रमुख वैश्विक बाजारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा।
अमेरिकी बाजारों में मंगलवार को कमजोरी देखने को मिली थी। नैस्डैक इंडेक्स 0.6 प्रतिशत और एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भी एशियाई बाजारों की धारणा पर पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थितियों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। फिलहाल मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीदें बाजार को समर्थन दे रही हैं, लेकिन बढ़ती तेल कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
--आईएएनएस
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