businesskhaskhabar.com

Business News

Home >> Business

इस साल डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण अनिवार्य होने की संभावना: शीर्ष अधिकारी

Source : business.khaskhabar.com | May 30, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 isobutanol blending in diesel likely to become mandatory this year top official 817391नई दिल्ली । देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और सड़क एवं राजमार्ग क्षेत्र को कार्बन मुक्त बनाने के लिए सरकार इस साल ही डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग यानी मिश्रण को अनिवार्य बना सकती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव वी. उमाशंकर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। 
सीआईआई मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स समिट में बोलते हुए उमाशंकर ने कहा, "डीजल ब्लेंडिंग को बहुत गंभीरता से देखा जा रहा है। भारत पेट्रोलियम पहले से ही डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग पर रणनीतिक रिसर्च कर रही है और इसके नतीजे काफी उत्साहजनक हैं। संभावना है कि इस साल के आखिर तक ब्लेंडिंग अनिवार्यता लागू हो सकती है। भारत में डीजल की खपत पेट्रोल के मुकाबले लगभग दोगुनी है, इसलिए डीजल ब्लेंडिंग का असर ऊर्जा सुरक्षा पर पेट्रोल ब्लेंडिंग से भी ज्यादा होगा।"
उन्होंने बताया कि मंत्रालय इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग का इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से जल्द ही ट्रक-ट्रेलर से जुड़ा ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लाने की तैयारी कर रहा है।
उमाशंकर ने कहा कि बैटरी स्वैपिंग के लिए देशभर में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। वहीं बैटरी चार्जिंग में अधिक समय लगता है, ऐसे में ट्रकों को लंबे समय तक खड़ा रखना व्यावहारिक नहीं होगा।
उन्होंने कहा, "हम ट्रैक्टर-ट्रेलर इंटरचेंजिबिलिटी मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसमें बैटरी बदलने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि ट्रक का पूरा अगला हिस्सा बदला जाएगा। कंटेनर और ट्रेलर अलग किए जा सकेंगे।"
हाइड्रोजन-आधारित लॉजिस्टिक्स पर चल रहे सरकारी प्रयोगों के बारे में उन्होंने कहा कि इसके नतीजे काफी अच्छे हैं। लॉजिस्टिक्स की लागत अन्य विकल्पों के मुकाबले ज्यादा नहीं है। हालांकि, हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित करने में अधिक खर्च आता है और फिलहाल सरकार पायलट प्रोजेक्ट्स में इसके लिए सहायता दे रही है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में हाल ही में हाइड्रोजन बसें दिल्ली-फरीदाबाद और दिल्ली-नोएडा रूट पर शुरू की गई हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
उमाशंकर ने कहा, "एक बार फ्यूल भरने के बाद ये बसें लगभग 450 किलोमीटर तक चल सकती हैं। अगर दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर की बात करें, तो नए एक्सप्रेसवे पर केवल तीन रिफ्यूलिंग स्टेशन ही पर्याप्त होंगे।"
इसके अलावा उन्होंने बताया कि मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) यानी बिना बैरियर वाली टोलिंग प्रणाली को अगले साल देश भर में लागू किया जा सकता है। इस तकनीक में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने आगे कहा, "यह सिस्टम (एमएलएफएफ) दो टोल प्लाजा पर सफलतापूर्वक लागू हो चुका है और तीसरा टोल प्लाजा अगले 8-10 दिनों में शुरू हो जाएगा। हमारी योजना अगले साल के भीतर देश के सभी चार लेन और उससे बड़े टोल प्लाजा पर इसे लागू करने की है।"
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली-एनसीआर के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसके लिए टेंडर प्रक्रिया और परियोजना का कार्य शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि सड़कों और राजमार्गों पर वाहनों की औसत गति बढ़ाने के लिए मंत्रालय एक्सप्रेसवे और एक्सेस-कंट्रोल हाईवे पर विशेष ध्यान दे रहा है, ताकि धीमी और तेज रफ्तार वाहनों के ट्रैफिक को अलग-अलग किया जा सके।
--आईएएनएस
 

[@ कछुआ से लाए घर में ढेर सारी सुख और समृद्धि]


[@ गुणकारी अंगूर,जानिए इसके 5 लाभ]


[@ कोमा से बाहर आते ही बोलने लगा दूसरे देश की भाषा]



Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0