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फिर बढ़ेगी महंगाई : बंपर पैदावार के बावजूद रिकॉर्ड तेजी पर गेहूं, ओपन मार्केट टेंडर में देरी पड़ेगी भारी

Source : business.khaskhabar.com | July 28, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 inflation will rise again wheat prices at record highs despite bumper production delay in open market tender will be costly 832148
बिजनेस डेस्क। जयपुर 

देश में इस साल गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने के बावजूद आम उपभोक्ता की थाली से 'सस्ती रोटी' दूर होती दिख रही है। जयपुर की स्थानीय अनाज मंडी में मिल डिलीवरी दड़ा गेहूं के थोक भाव फिलहाल 2,700 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बने हुए हैं। 

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार ने सही समय पर और वाजिब दामों पर केंद्रीय पूल से खुले बाजार के लिए टेंडर जारी नहीं किए, तो आने वाले दिनों में गेहूं और आटे की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी गोदामों (FCI) में नए और पुराने गेहूं का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद खुले बाजार में आवक सीमित होने से कीमतें चढ़ रही हैं। 

जयपुर के वीकेआई (रोड नंबर तीन) स्थित प्रसिद्ध 'मित्तल ब्रांड दलिया' के निर्माता मुकुल मित्तल के अनुसार इस वर्ष देश में गेहूं का रकबा 328 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 334 लाख हेक्टेयर हो गया था। मौसम अनुकूल रहने से गेहूं का उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 1,202 लाख टन (120.2 मिलियन टन) पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले साल महज 1,090 लाख टन था। जब देश में उत्पादन में 112 लाख टन का इजाफा हुआ है, तब थोक भावों में इस तरह की नरमी न आना सीधे तौर पर नीतिगत निर्णयों और टेंडर प्रक्रिया में देरी की ओर इशारा करता है। 

गेहूं की कीमतों को नियंत्रित रखने में सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रही तेजी है। बीते एक महीने के भीतर वैश्विक कमोडिटी वायदा बाजार में गेहूं के दाम में लगभग 14 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके चलते भारतीय गेहूं अब अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए काफी आकर्षक और प्रतिस्पर्धी बन गया है। 

केंद्र सरकार ने लगातार चार वर्षों के कड़े प्रतिबंधों के बाद वर्ष 2026 में 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है। यदि वैश्विक बाजार में मिल रहे ऊंचे दामों के लालच में भारतीय गेहूं का निर्यात तेजी से बढ़ा और घरेलू खुले बाजार में केंद्रीय पूल से स्टॉक नहीं छोड़ा गया, तो आने वाले त्योहारी सीजन में गेहूं और आटे की महंगाई को रोक पाना लगभग असंभव हो जाएगा। 

केंद्रीय पूल से खुले बाजार में हो तुरंत बिक्रीः 

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और आटा मिल मालिकों का कहना है कि सरकार को महंगाई की आहट को भांपते हुए तुरंत 'ओपन मार्केट टेंडर' जारी करने चाहिए। सरकारी गोदामों से गेहूं की पर्याप्त आपूर्ति ही बाजार में सट्टेबाजी और कृत्रिम किल्लत को रोक सकती है।

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