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भारत दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता, विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति मजबूत : आर्थिक सर्वेक्षण

Source : business.khaskhabar.com | Jan 29, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india remains world largest remittance recipient foreign exchange reserves strong economic survey 787794नई दिल्ली । भारत दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता बना हुआ है और वित्त वर्ष 25 में कुल 135.4 अरब डॉलर रेमिटेंस के रूप में प्राप्त किए थे। इससे देश की बाह्य खाते में स्थिरता बढ़ाने में मदद मिल रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुए आर्थिक सर्वेक्षण में दी गई। 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि देश को आने वाले वार्षिक रेमिटेंस में विकसित देशों की हिस्सेदारी बढ़ रही है और स्किल एवं प्रोफेशनल वर्कर्स का हिस्सा बढ़ रहा है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए विनिर्माण लागत कम करने हेतु एकीकृत प्रयास आवश्यक हैं।
वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती के बावजूद, भारत ने लगातार पर्याप्त सकल निवेश आकर्षित किया है, जो वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी का 18.5 प्रतिशत रहा।
यूएनसीटीएडी के आंकड़ों के अनुसार, भारत दक्षिण एशिया में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना रहा और इसने इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रमुख एशियाई देशों को पीछे छोड़ दिया।
2024 में ग्रीनफील्ड निवेश घोषणाओं में भारत वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर रहा, जिसमें 1,000 से अधिक परियोजनाएं शामिल थीं, और 2020-24 के बीच ग्रीनफील्ड डिजिटल निवेश के लिए सबसे बड़ा गंतव्य बनकर उभरा, जिसने 114 अरब डॉलर आकर्षित किए।
अप्रैल-नवंबर 2025 में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफपीआई) बढ़कर 64.7 अरब डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल-नवंबर 2024 में यह 55.8 अरब डॉलर था।
इसके अलावा, सर्वेक्षण में बताया गया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी तक बढ़कर 701.4 अरब डॉलर हो गया, जो मार्च के अंत तक 668 अरब डॉलर था।
सितंबर 2025 के अंत तक भंडार लगभग 11 महीनों के माल आयात और बकाया बाह्य ऋण के लगभग 94 प्रतिशत को कवर करने के लिए पर्याप्त है, जिससे एक आरामदायक तरलता बफर उपलब्ध होता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि मुद्रा का प्रदर्शन अर्थव्यवस्था की घरेलू बचत उत्पन्न करने, बाह्य संतुलन बनाए रखने, स्थिर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने और नवाचार, उत्पादकता और गुणवत्ता पर आधारित निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता विकसित करने की क्षमता से निर्धारित होता है।
सितंबर 2025 के अंत तक भारत का बाह्य ऋण 746 अरब डॉलर था, जो मार्च 2025 के अंत में 736.3 अरब डॉलर से अधिक था, जबकि बाह्य ऋण-जीडीपी अनुपात सितंबर 2025 के अंत में 19.2 प्रतिशत था।
इसके अलावा, बाह्य ऋण भारत के कुल ऋण का 5 प्रतिशत से कम है, जिससे बाह्य क्षेत्र के जोखिम कम होते हैं।
--आईएएनएस
 

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