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भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर वृद्धि के लिए तैयार, 2027 तक रेपो रेट में बदलाव की संभावना नहीं: रिपोर्ट 

Source : business.khaskhabar.com | Jan 27, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india economy poised for stable growth repo rate unlikely to change until 2027 report 787320नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में स्थिर गति से बढ़ती रहेगी। वर्ष 2026 में देश की जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत और 2027 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। मंगलवार को जारी डीबीएस बैंक की रिपोर्ट में यह बात कही गई। 


डीबीएस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा महंगाई (सीपीआई) के 2025 में 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 3.5 प्रतिशत और 2027 में 4.5 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। इसका मतलब है कि कीमतें धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट सकती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 2026 और 2027 के दौरान नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि देश की मौद्रिक नीति स्थिर बनी रहेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक ब्याज दरों में अस्थिरता के बावजूद, भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। यह 2026 की शुरुआत में 6.60 प्रतिशत से घटकर 2027 के अंत तक 6.40 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
पिछले हफ्ते वैश्विक बॉन्ड बाजारों में बड़ी हलचल देखी गई, और विकसित देशों में बॉन्ड यील्ड कई दशकों के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं।
हालांकि, डीबीएस बैंक का मानना है कि यह गिरावट किसी बड़े संकट का संकेत नहीं, बल्कि बाजार का सामान्य स्थिति में लौटना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरावट भले ही चिंता पैदा करे, लेकिन इससे किसी आर्थिक संकट का खतरा नहीं दिखता।
जापान को छोड़कर अन्य विकसित बाजारों में बढ़ी हुई बॉन्ड यील्ड को भी बाजार की स्थिति सामान्य होने का संकेत माना गया है। बैंक के अनुसार, केंद्रीय बैंकों की विश्वसनीयता और सरकार व केंद्रीय बैंक के बीच तालमेल बाजार को स्थिर बनाए रख सकता है।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 27-28 जनवरी को होने वाली एफओएमसी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। इससे पहले फेड तीन बार ब्याज दरों में कटौती कर चुका है।
डीबीएस बैंक ने कहा कि फेड का यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ रुख दिखाने के लिए नहीं होगा, बल्कि केंद्रीय बैंक पहले की गई कटौतियों के असर और महंगाई के जोखिम का आकलन करना चाहता है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां नौकरियों की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन बेरोजगारी दर अभी भी कम है और लोगों की आय बढ़ रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है।
--आईएएनएस
 

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