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सरकार ने 116 करोड़ रुपए की सहायता के लिए मनस्तु स्पेस के साथ किया समझौता, स्वदेशी ग्रीन प्रोपल्शन तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

Source : business.khaskhabar.com | Oct 26, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 government signs agreement with manastu space for ₹116 crore assistance indigenous green propulsion technology to get a boost 856241नई दिल्ली । भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने और अंतरिक्ष तक टिकाऊ पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) ने महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ 116 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहायता अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड के तहत प्रदान की जाएगी। 
कुल 277.63 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के लिए 5 मिली-न्यूटन (एमएन) से 300 न्यूटन (एन) तक की थ्रस्ट क्षमता वाले एकीकृत और विस्तार योग्य (स्केलेबल) ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम का विकास करना है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य प्रौद्योगिकी को टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (टीआरएल)-6 से बढ़ाकर टीआरएल-9 तक पहुंचाना है, जिससे इसके विकास, परीक्षण और व्यावसायिक उपयोग का मार्ग प्रशस्त हो सके। परियोजना को वित्तीय सहायता ऑप्शनली कन्वर्टिबल डेट (ओसीडी) के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज एक स्वदेशी ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित कर रही है, जो उपग्रहों और लॉन्च वाहनों के लिए संपूर्ण प्रोपल्शन समाधान प्रदान करेगा। यह तकनीक हाइड्रोजन पेरॉक्साइड आधारित ग्रीन प्रोपेलेंट और विशेष एडिटिव्स पर आधारित है, जिसे एक एकीकृत इंजन और कैटेलिस्ट सिस्टम का समर्थन प्राप्त होगा।
कंपनी के अनुसार, यह प्रणाली पारंपरिक प्रोपेलेंट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन, अधिक लागत दक्षता और सुरक्षित संचालन उपलब्ध कराएगी। इसकी विशेषता यह है कि इसे छोटे उपग्रहों से लेकर उच्च थ्रस्ट वाले मिशनों तक विभिन्न आवश्यकताओं के अनुरूप इस्तेमाल किया जा सकेगा।
परियोजना के तहत प्रोपल्शन इंजन, प्रोपेलेंट फीड सिस्टम और अत्यधिक उच्च तापमान सहन करने वाले सिरेमिक कैटेलिस्ट का भी विकास किया जाएगा, जिससे कठिन परिस्थितियों में भी प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे।
टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि स्वदेशी प्रोपल्शन तकनीकें भारत की अंतरिक्ष मूल्य शृंखला (स्पेस वैल्यू चेन) को मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत का अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र विस्तार कर रहा है, वैसे-वैसे ऐसे प्रोपल्शन सिस्टम की जरूरत बढ़ रही है जो प्रदर्शन, विश्वसनीयता, सुरक्षा और लागत दक्षता का संतुलन प्रदान कर सकें।
वहीं मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) ने कहा कि आरडीआई फंड के तहत मिला समर्थन कंपनी को अपनी ग्रीन प्रोपल्शन तकनीक के विकास, एकीकरण और वैधीकरण की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसा स्केलेबल प्रोपल्शन प्लेटफॉर्म विकसित करना है जो उच्च प्रदर्शन, विश्वसनीयता और लागत दक्षता के साथ-साथ सुरक्षित और टिकाऊ प्रोपेलेंट सिस्टम की बढ़ती मांग को भी पूरा कर सके।
--आईएएनएस
 

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