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लॉजिस्टिक्स चुनौतियों के बावजूद भारत का चावल निर्यात मजबूत, वैश्विक फूड सिक्योरिटी में हमारी भूमिका और बढ़ी: विशेषज्ञ

Source : business.khaskhabar.com | Oct 24, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 india rice exports remain robust despite logistics challenges our role in global food security continues to grow experts 855921नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 के दौरान उद्योग जगत, निर्यातकों, नीति निर्माताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा कि भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। सम्मेलन के दौरान एपीडा, राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और कई अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने चावल उद्योग से जुड़ी चुनौतियों, अवसरों और भविष्य की रणनीतियों पर आईएएनएस से विस्तार से बात की। 
वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत एपीडा के महाप्रबंधक तरुण बजाज ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन धीरे-धीरे दुनिया के सबसे बड़े चावल-केंद्रित आयोजनों में बदलता जा रहा है।
उन्होंने कहा, "भारत वैश्विक चावल निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और दुनिया का निर्विवाद नेता है। ऐसे में भारत में ऐसा मंच होना जरूरी है, जहां किसान से लेकर उपभोक्ता तक पूरी वैल्यू चेन के लोग एक साथ बैठकर चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा कर सकें।"
उन्होंने आगे कहा कि अभी सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स की है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी जैसे क्षेत्रों में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, शिपिंग समय बढ़ा है, बीमा लागत बढ़ी है और परिवहन शुल्क कई गुना तक बढ़ गए हैं। इसके बावजूद भारत सरकार, राज्य सरकारों और उद्योग जगत के संयुक्त प्रयासों से निर्यात को सुचारू बनाए रखने की कोशिश जारी है। उन्होंने कहा कि चावल केवल एक व्यापारिक उत्पाद नहीं बल्कि कई देशों की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है और भारत एक जिम्मेदार देश के रूप में अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ आयातक देशों की खाद्य सुरक्षा का भी ध्यान रख रहा है।
इसके साथ ही, राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजीव कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत की स्थिति वैश्विक चावल निर्यात बाजार में बेहद मजबूत है। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे, तीसरे और चौथे सबसे बड़े चावल निर्यातकों की संयुक्त हिस्सेदारी भी भारत से कम है। हालांकि उन्होंने आगाह किया कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स लागत है।
उन्होंने बताया कि थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देश जलमार्गों पर अधिक निर्भर हैं, जबकि भारत में अधिकांश परिवहन सड़क मार्ग से होता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार और उद्योग जगत को ऐसे चावल के उत्पादन पर अधिक ध्यान देना चाहिए जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग अधिक हो, ताकि निर्यातकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का समर्थन लगातार मिल रहा है और भारत कई वर्षों से 35-40 प्रतिशत वैश्विक बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने में सफल रहा है।
ईवाई (अर्न्स्ट एंड यंग एलएलपी) के पार्टनर प्रशांत रायजादा ने आईएएनएस को बताया कि यह सम्मेलन चावल क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावशाली आयोजन है। उन्होंने कहा कि यहां उद्योग के वरिष्ठ विशेषज्ञों, निर्यातकों और नीति निर्माताओं के साथ विचार साझा करने का अवसर मिला, जो पूरे क्षेत्र के लिए उपयोगी है।
वहीं, कृभको एग्री के मुख्य प्रबंधक राजेश पहारिया जैन ने न्यूज एजेंसी से कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सम्मेलन का दायरा और भागीदारी दोनों बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि बोरियां बनाने वाले उद्योगों से लेकर सर्वेयर, कस्टम हाउस एजेंट, किसान और निर्यातक तक पूरी वैल्यू चेन एक मंच पर मौजूद है।
उन्होंने आगे कहा, "मौसम संबंधी चुनौतियों और फसल उत्पादन में संभावित कमी के बावजूद देश के पास भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से लगभग 5.5 से 6 करोड़ टन का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे स्थिति सुरक्षित बनी हुई है।" साथ ही उन्होंने सरकार से निर्यात उद्योग के लिए ब्याज सहायता और कुछ अतिरिक्त प्रोत्साहनों की भी मांग की।
इसके अलावा, एग्रीगुरु ऑनलाइन की संस्थापक हंसा सिंह राक्या ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उनकी कंपनी ने दुनिया का पहला एआई-आधारित मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो खरीदारों और विक्रेताओं को वास्तविक समय में कीमतों, फ्रेट लागत, व्यापार नियमों, वैश्विक घटनाक्रमों और बाजार से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराता है। उन्होंने बताया, "मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और बदलती व्यापार नीतियों के दौर में सही और पारदर्शी जानकारी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यह प्लेटफॉर्म खरीदारों और विक्रेताओं को अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय एक ही स्थान पर सभी जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है।"
वहीं, यूरोफिन्स एनालिटिकल सर्विसेज इंडिया के प्रबंध निदेशक डॉ. पंकज जैमिनी ने न्यूज एजेंसी से कहा कि यह आयोजन पूरे उद्योग को एक मंच पर लाने का सफल प्रयास है, जहां खरीदार, निर्यातक, परीक्षण प्रयोगशालाएं और शोध संस्थान मिलकर भविष्य की चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा कर सकते हैं।
एसजीएस फूड टेस्टिंग सर्विसेज की प्रमुख पूर्वी शाह ने आईएएनएस को बताया कि ऐसे सम्मेलन वैश्विक व्यापार को आसान बनाने में मदद करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि खरीदार-विक्रेता बैठकों और नई वैश्विक आवश्यकताओं की जानकारी साझा करने से सीमा शुल्क या गुणवत्ता संबंधी अस्वीकृतियों को कम किया जा सकता है।
--आईएएनएस

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