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गूगल फायरबेस स्कैम एक्सप्लेनर : साइबर अपराधी फिशिंग और धोखाधड़ी के लिए प्लेटफॉर्म का कर रहे दुरुपयोग

Source : business.khaskhabar.com | Aug 23, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 google firebase scam explainer cybercriminals are misusing the platform for phishing and fraud 838870
बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 

गूगल के फायरबेस प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस के खिलाफ भारत की कार्रवाई ने इस बात को सामने लाया है कि साइबर अपराधी कथित तौर पर एक वैध क्लाउड सेवा का इस्तेमाल फिशिंग अभियान चलाने, मैलवेयर फैलाने और संवेदनशील वित्तीय जानकारी चुराने के लिए कर रहे हैं। 

ऐसे में सवाल उठता है कि फायरबेस क्या है, ठग इसका दुरुपयोग कैसे कर रहे हैं और यह भारतीय साइबर अधिकारियों के लिए चिंता का विषय क्यों बन गया है? फायरबेस, दिग्गज आईटी कंपनी गूगल का क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जो डेवलपर्स को मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइट बनाने, चलाने और मैनेज करने में मदद करता है। इसमें वेबसाइट होस्टिंग, डेटा स्टोरेज, यूजर ऑथेंटिकेशन, एनालिटिक्स और ऐप से जुड़ी अन्य सेवाओं जैसे कार्यों के लिए कई तैयार टूल उपलब्ध हैं। 

इस प्लेटफॉर्म का दुनियाभर के डेवलपर्स बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं और यह गूगल के क्लाउड कारोबार का हिस्सा है। किसी एप्लिकेशन के बैकएंड के हर हिस्से को शून्य से बनाने के बजाय डेवलपर्स फायरबेस के इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं का इस्तेमाल कर ऐप को अधिक कुशलता से विकसित और संचालित कर सकते हैं। फायरबेस खुद एक वैध तकनीकी प्लेटफॉर्म है। 

भारतीय अधिकारियों द्वारा उठाई गई चिंताएं साइबर अपराधियों द्वारा इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के कथित दुरुपयोग से जुड़ी हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के लिए फायरबेस या गूगल जिम्मेदार है। 

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) की ओर से गूगल को भेजे गए नोटिस के अनुसार, जालसाज कथित तौर पर फायरबेस पर होस्ट की गई वेबसाइटों का इस्तेमाल बड़े बैंकों और अन्य भरोसेमंद संगठनों की नकल करने वाले फर्जी पेज बनाने के लिए कर रहे थे। 

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ वेबसाइटों ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बैंकों की नकल की। ऐसे पेज वास्तविक बैंकिंग वेबसाइटों जैसे दिखने के लिए बनाए जा सकते हैं और यूजर्स को संवेदनशील जानकारी दर्ज करने के लिए धोखा दे सकते हैं। नोटिस में फायरबेस पर होस्ट की गई ऐसी वेबसाइटों की भी पहचान की गई, जिनका कथित तौर पर पीड़ितों के स्मार्टफोन से चुराई गई जानकारी इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इसमें क्रेडिट कार्ड की जानकारी और वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भी शामिल थे। 

वैध क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके ठग संभावित रूप से फर्जी वेबसाइटों और बैकएंड सिस्टम को ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना में कम संदिग्ध दिखा सकते हैं, जिसे विशेष रूप से आपराधिक गतिविधियों के लिए बनाया गया हो। एक रिपोर्ट किए गए मामले में ठगों ने कथित तौर पर पीएम-किसान भुगतान में सहायता देने का दावा करने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाई थीं। इन वेबसाइटों के जरिए पीड़ितों को एक एंड्रॉयड एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए राजी किया गया।

आरोप है कि यह एप्लिकेशन फर्जी थी और पीड़ित के फोन से जानकारी इकट्ठा कर सकती थी। चोरी की गई जानकारी को बाद में ठगों द्वारा नियंत्रित फायरबेस डेटाबेस में भेजा जा सकता था। इस तरह एक पूरी कड़ी तैयार होती है, जिसमें फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल पीड़ित को फंसाने के लिए किया जाता है, फर्जी एप्लिकेशन का इस्तेमाल डिवाइस से जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता है और फायरबेस डेटाबेस चोरी किए गए डेटा को प्राप्त करने या स्टोर करने के लिए बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर के एक हिस्से के रूप में काम करता है। 

फायरबेस को अकसर ‘बैकएंड-एज-ए-सर्विस’ प्लेटफॉर्म कहा जाता है, क्योंकि यह डेवलपर्स को किसी एप्लिकेशन के बैकएंड के कुछ हिस्सों को मैनेज करने के लिए तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर और टूल उपलब्ध कराता है। इसकी डेटाबेस सेवाएं एप्लिकेशन को डेटा स्टोर और सिंक्रोनाइज करने की सुविधा देती हैं, जबकि फायरबेस की अन्य सुविधाएं होस्टिंग, ऑथेंटिकेशन और एप्लिकेशन मैनेजमेंट में मदद करती हैं। 

ये सुविधाएं वैध डेवलपर्स के लिए उपयोगी हैं, क्योंकि इससे उन्हें बैकएंड सिस्टम को शुरू से बनाने की जरूरत कम हो जाती है। हालांकि, इन्हीं सुविधाओं का अपराधी संभावित रूप से फर्जी पेज होस्ट करने, फर्जी एप्लिकेशन को सपोर्ट करने या पीड़ितों से हासिल किए गए डेटा को स्टोर करने के लिए दुरुपयोग कर सकते हैं। इस कारण समस्या फायरबेस के अस्तित्व में नहीं है, बल्कि इस बात में है कि वैध क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को धोखाधड़ी की गतिविधियों के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है। 

भारत ने अगस्त में गूगल को फायरबेस पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया, जब अधिकारियों ने पाया कि इनका कथित तौर पर फिशिंग, मैलवेयर वितरण और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। यह कार्रवाई आई4सी की ओर से भेजे गए उन नोटिस के बाद की गई, जिनमें ऐसी वेबसाइटों और डेटाबेस की पहचान की गई थी, जो कथित तौर पर धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल थे। -आईएएनएस

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