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ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए असम के चार उत्पादों को मिला जीआई टैग 

Source : business.khaskhabar.com | Jun 14, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 four assam products receive gi tag to boost rural livelihoods 821243गुवाहाटी। भारत सरकार की 'जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री' ने असम के चार खास सांस्कृतिक और कारीगरी वाले उत्पादों को 'जियोग्राफिकल इंडिकेशन' (जीआई) का दर्जा दिया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि यह राज्य की पारंपरिक विरासत को बचाने और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है। 

हाल ही में जीआई टैग किए गए उत्पादों में कार्बी आंगलोंग हैंडलूम उत्पाद, असम बिहू पेपा, असम बांस शिल्प और देउरी हैंडलूम उत्पाद शामिल हैं। ये उत्पाद असम की पारंपरिक कारीगरी, आदिवासी विरासत और सांस्कृतिक पहचान की विविधता को दर्शाते हैं।

इस सर्टिफिकेशन प्रोसेस में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड ) ने मदद और सहयोग दिया है। नाबार्ड राज्य के खास उत्पादों के लिए जीआई रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देने का काम सक्रिय रूप से कर रहा है।

नाबार्ड असम के चीफ जनरल मैनेजर लोकेन दास ने कहा कि इस पहचान से इन पारंपरिक उत्पादों की पहचान और प्रमाणिकता मजबूत होगी और साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बाजार क्षमता भी काफी बढ़ेगी।

दास ने कहा कि ये सर्टिफिकेशन न केवल इन उत्पादों की पहचान और प्रमाणिकता को मजबूत करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बाजार क्षमता को भी बढ़ाते हैं। इस उपलब्धि के साथ, नाबार्ड द्वारा समर्थित जीआई-सर्टिफाइड उत्पादों की कुल संख्या 12 हो गई है, जो विरासत-आधारित ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।

असम अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है जो इसकी हैंडलूम परंपराओं, स्थानीय शिल्प और लोक कलाओं में झलकती है। इनमें से कई उत्पाद ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने से गहराई से जुड़े हैं और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक जानकारी और कारीगरी को दर्शाते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि जीआई सर्टिफिकेशन से अनधिकृत नकल और दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी सुरक्षा मिलेगी, साथ ही कारीगरों और बुनकरों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार तक पहुंच, अच्छी कीमत और व्यापक पहचान पाने में मदद मिलेगी।

इस विकास से राज्य भर के हजारों ग्रामीण कारीगरों, शिल्पकारों और बुनकरों को फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे पारंपरिक कौशल की सुरक्षा के साथ-साथ नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।

आगे की योजना के बारे में बात करते हुए, दास ने कहा कि नाबार्ड जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम-आधारित रणनीति की कल्पना करता है, जिसका फोकस उन्हें टिकाऊ और मुनाफे वाले आजीविका के अवसरों में बदलना है।

नाबार्ड के अनुसार, अब ध्यान पहचान हासिल करने से हटकर एक मजबूत वैल्यू चेन बनाने पर होगा, जिसमें ब्रांडिंग, मार्केटिंग, क्षमता निर्माण, बाजार से जुड़ाव और उद्यम विकास शामिल होंगे।

दास ने आगे कहा कि मुख्य विजन जीआई-सर्टिफाइड उत्पादों को टिकाऊ, बड़े पैमाने पर विस्तार योग्य और मुनाफे वाले आजीविका के अवसरों में बदलना है, साथ ही असम की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।

हालिया पहचान से असम के जीआई उत्पादों का पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है और ग्रामीण आर्थिक विकास के लिए पारंपरिक जानकारी और सांस्कृतिक संपत्तियों का लाभ उठाने के प्रयासों को बल मिला है।

--आईएएनएस

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