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'विकसित भारत 2047' के लिए विनिर्माण, निवेश और एआई कौशल पर फोकस जरूरी: मुख्य आर्थिक सलाहकार

Source : business.khaskhabar.com | Sep 25, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 focus on manufacturing investment and ai skills crucial for viksit bharat 2047 chief economic advisor 847652मुंबई । मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करना है, तो उसे अपने विनिर्माण आधार को मजबूत करना होगा, अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करना होगा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित भविष्य के लिए कार्यबल को तैयार करना होगा। 
मुंबई में आयोजित 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि भारत की विकास यात्रा ऐसे समय आगे बढ़ रही है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनावों, सप्लाई चेन के बढ़ते रणनीतिक उपयोग, जलवायु संबंधी अनिश्चितताओं और चीन के विनिर्माण क्षेत्र से कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को अपनी पारंपरिक सोच और कार्यप्रणालियों में बदलाव लाना होगा। भारत के लिए दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ आर्थिक मजबूती और लचीलेपन का निर्माण भी उतना ही जरूरी होगा।
नागेश्वरन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को अधिक संतुलित और सुरक्षित बनाने में विनिर्माण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि देश के सामने विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में से किसी एक को चुनने का सवाल नहीं है, बल्कि दोनों क्षेत्रों का समानांतर विस्तार जरूरी है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ और व्यापक आर्थिक विकास के लिए सेवाओं और मैन्युफैक्चरिंग दोनों को मजबूत करना होगा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आगे बताया कि तेल और सोने को छोड़कर भारत का माल व्यापार घाटा (गुड्स ट्रेड डेफिसिट) अभी भी जीडीपी के लगभग 3.5 से 4 प्रतिशत के बीच बना हुआ है। यह दर्शाता है कि देश को अपनी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आयात प्रतिस्थापन नहीं होना चाहिए। भारत को घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी निर्यात क्षमता विकसित करने पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।
नागेश्वरन ने कहा कि वैश्विक निवेश आकर्षित करने के मामले में भारत को विकसित अर्थव्यवस्थाओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए केंद्र और राज्यों दोनों स्तरों पर नीतिगत ढांचे को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कर व्यवस्था में निश्चितता, सरल नियामकीय वातावरण, निवेशकों की बेहतर सुरक्षा और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता जैसे कारक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आवश्यक वस्तुओं के लिए रणनीतिक भंडार विकसित करने और उन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण पुर्जों एवं घटकों के घरेलू उत्पादन पर भी जोर दिया, जो वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा आने की स्थिति में बड़ी समस्या बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल बड़े औद्योगिक संयंत्र स्थापित करने से आर्थिक मजबूती नहीं आती, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को सप्लाई चेन की कमजोर कड़ियों की पहचान करनी होगी और संभावित झटकों से निपटने की तैयारी पहले से करनी होगी, ताकि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियां बाधित न हों।
 

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