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डार्क वेब पर एसबीआई ग्राहकों के डेटा लीक की खबरों पर सीपीआई-एम सांसद ने उठाए सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग

Source : business.khaskhabar.com | Oct 23, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 cpi(m) mp raises questions over reports of sbi customer data leak on dark web demands independent investigation 855469
तिरुवनंतपुरम । सीपीआई-एम के राज्यसभा सदस्य ए.ए. रहीम ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने डार्क वेब पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के ग्राहकों का डेटा लीक होने की खबरों की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के पास मौजूद ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। 
ए.ए. रहीम ने वित्त मंत्रालय से आग्रह किया कि वे संदिग्ध डेटा लीक के स्रोत और इसके दायरे का पता लगाएं। यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित ग्राहकों को सीधे सूचित किया जाए और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करें।
यह कदम उन रिपोर्टों के बीच उठाया गया है, जिनमें कहा गया है कि एसबीआई ने डार्क वेब पर मौजूद डेटा में 3,897 ऐसे ग्राहकों के रिकॉर्ड की पहचान की है, जिनमें उनकी निजी पहचान से जुड़ी जानकारी शामिल है।
बैंक को 16 अक्टूबर को अपने 'थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर', 'डिफेंस साइबर एजेंसी' और 'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' (सीईआरटी-इन) से इस संदिग्ध डेटा लीक के बारे में अलर्ट मिले थे। इस घटना की जांच के लिए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को काम पर लगाया गया है।
वहीं, जिन जानकारियों के लीक होने की बात सामने आई है, उनमें ग्राहकों के नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, जन्म तिथि, ईमेल और घर का पता, ब्रांच की जानकारी, कस्टमर इंफॉर्मेशन फाइल (सीआईएफ) आइडेंटिफायर और लोन व लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडेटा शामिल है।
राज्यसभा सदस्य ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी जानकारी गलत हाथों में चली जाती है, तो आम ग्राहकों को 'आइडेंटिटी थेफ्ट', टारगेटेड फिशिंग, किसी और का रूप धरने और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेंशनभोगी, मजदूर, छोटे व्यापारी और अन्य कमजोर वर्ग के लोग विशेष रूप से खतरे में आ सकते हैं।
सीपीआईएम के सांसद ने तर्क दिया कि बैंकिंग सेवाओं में कोई रुकावट न आने का मतलब यह नहीं है कि निजी जानकारी लीक होने का मामला गंभीर नहीं है।
एसबीआई का कहना है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज या बिजनेस की निरंतरता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। ए.ए. रहीम ने जांच के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की और बैंक से कहा कि वह ग्राहकों के लिए ऐसे आसान माध्यम बनाए, जहां वे संदिग्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट कर सकें और मदद ले सकें।
उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के नतीजों और उठाए गए सुधारात्मक कदमों के बारे में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। इस मुद्दे को केवल एसबीआई तक सीमित न रखते हुए सांसद ने वित्त मंत्रालय से कहा कि वह सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में साइबर सुरक्षा उपायों की समीक्षा करे, रियल-टाइम में खतरों का पता लगाने की क्षमता और डेटा-एक्सेस कंट्रोल को मजबूत करे और जहां भी लापरवाही या सुरक्षा में चूक पाई जाए, वहां जवाबदेही तय करे।
यह पत्र इस बात पर जोर देता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की यह जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा करें, भले ही उनके मुख्य बैंकिंग सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हों। इस संदिग्ध डेटा लीक का पूरा दायरा और स्रोत अभी भी जांच के दायरे में है।
--आईएएनएस

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