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25,000 रुपए की मासिक एसआईपी या 5 लाख रुपए का लंपसम निवेश, 20 साल में किससे बनेगा ज्यादा फंड?

Source : business.khaskhabar.com | Oct 25, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 a monthly sip of ₹25000 or a lump sum investment of ₹5 lakh—which one will build a larger corpus over 20 years 856018नई दिल्ली। म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि एक साथ बड़ी रकम निवेश करना बेहतर है या हर महीने थोड़ी-थोड़ी राशि लगाना। दोनों तरीकों के अपने फायदे और जोखिम होते हैं। अगर आपके पास 5 लाख रुपए हैं, तो आप इस रकम को एकमुश्त निवेश कर सकते हैं। वहीं, नियमित आय होने पर 25,000 रुपए की मासिक एसआईपी भी शुरू कर सकते हैं। लेकिन 20 साल में किस विकल्प से कितना बड़ा निवेश फंड बन सकता है? चलिए कैलकुलेशन के जरिए समझते हैं। 

एकमुश्त निवेश का मतलब है कि आप अपनी पूरी रकम एक ही बार में म्यूचुअल फंड में लगा देते हैं। इस तरीके में शुरुआत से ही पूरी राशि निवेशित रहती है और उसे लंबे समय तक बाजार में बढ़ने का अवसर मिलता है। हालांकि, अगर निवेश के समय बाजार ऊंचे स्तर पर हो और उसके बाद गिरावट आए, तो आपको शुरुआती वर्षों में नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।



मान लीजिए कि आप किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड में 5 लाख रुपए का एकमुश्त निवेश करते हैं और अगले 20 साल तक आपको सालाना औसतन 12 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है। इस स्थिति में आपका निवेश बढ़कर लगभग 48.23 लाख रुपए हो सकता है।



इसमें आपकी मूल निवेश राशि 5 लाख रुपए होगी, जबकि अनुमानित लाभ करीब 43.23 लाख रुपए होगा। यानी दो दशक तक निवेश बनाए रखने पर आपकी शुरुआती रकम में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।



सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट स्कीम यानी एसआईपी के जरिए आप हर महीने एक निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इसमें एक साथ बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि नियमित अंतराल पर छोटी-छोटी रकम निवेश करके लंबे समय में बड़ा निवेश कोष बनाने का प्रयास किया जाता है।



नियमित वेतन या कारोबार से आय प्राप्त करने वाले लोगों के लिए यह तरीका सुविधाजनक हो सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान एसआईपी के जरिए अलग-अलग कीमतों पर फंड की इकाइयां खरीदी जाती हैं, जिससे निवेश की औसत खरीद लागत को संतुलित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इससे नुकसान से बचने या निश्चित रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं होती।



अब मान लीजिए कि आप हर महीने 25,000 की एसआईपी शुरू करते हैं और 20 साल तक इसे जारी रखते हैं। इस दौरान आपका कुल निवेश 60 लाख रुपए होगा। वहीं अगर आपको सालाना औसतन 12 प्रतिशत का अनुमानित रिटर्न मिलता है, तो आपका निवेश कोष लगभग 2.49 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।



इसमें आपकी ओर से जमा की गई मूल राशि 60 लाख रुपए होगी, जबकि अनुमानित लाभ करीब 1.89 करोड़ रुपए हो सकता है। इस तरह नियमित निवेश और चक्रवृद्धि वृद्धि के प्रभाव से लंबी अवधि में बड़ा निवेश कोष तैयार हो सकता है।



अब दोनों विकल्पों की तुलना करें, तो दिए गए अनुमानों के आधार पर 25,000 की मासिक एसआईपी से 20 साल में लगभग 2.49 करोड़ रुपए का निवेश कोष बन सकता है। वहीं, 5 लाख का एकमुश्त निवेश बढ़कर लगभग 48.23 लाख रुपए हो सकता है। इस तरह, दोनों के अंतिम मूल्य में करीब 2 करोड़ का अंतर दिखाई देता है।



लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। इन दोनों विकल्पों में कुल निवेश की रकम समान नहीं है। एकमुश्त निवेश में आप केवल 5 लाख रुपए लगाते हैं, जबकि मासिक एसआईपी में 20 साल के दौरान कुल 60 लाख रुपए जमा करते हैं। यानी एसआईपी में आप 55 लाख रुपए अधिक निवेश करते हैं। इसलिए केवल अंतिम निवेश कोष की तुलना करके यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि एसआईपी हर स्थिति में एकमुश्त निवेश से बेहतर है।



एकमुश्त निवेश में पूरी रकम पहले दिन से बाजार में काम करने लगती है, जबकि एसआईपी में पैसा धीरे-धीरे निवेश होता है। यदि बाजार लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करता है, तो शुरुआत में पूरी रकम निवेश करने से फायदा मिल सकता है। दूसरी ओर, एसआईपी नियमित आय वाले निवेशकों को अनुशासित तरीके से निवेश करने और बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश जारी रखने में मदद कर सकती है।



बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, एकमुश्त निवेश और एसआईपी में से किसी एक को चुनने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को समझना जरूरी है। यदि आपके पास पहले से बड़ी रकम उपलब्ध है, तो एकमुश्त निवेश पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, बाजार में गलत समय पर निवेश करने का जोखिम भी ध्यान में रखना चाहिए।



वहीं, यदि आप हर महीने वेतन या कारोबार से नियमित आय प्राप्त करते हैं और लंबे समय में संपत्ति बनाना चाहते हैं, तो एसआईपी आपके लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकती है। निवेश शुरू करने से पहले आपातकालीन जरूरतों के लिए पर्याप्त बचत रखना और महंगे कर्ज से बचना भी महत्वपूर्ण है।



--आईएएनएस

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