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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 से छोटे उद्योगों को भुगतान में देरी की समस्या में मिलेगी राहत: पीएचडीसीसीआई 

Source : business.khaskhabar.com | Aug 11, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 the micro small and medium enterprises development (amendment) bill 2026 will provide relief to small businesses from the problem of delayed payments phdcci 835633नई दिल्ली । पीएचडीसीसीआई सीईओ और महासचिव रणजीत मेहता ने सोमवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 से एमएसएमई को आने वाली बड़ी समस्या भुगतान में देरी को हल करने में मिलेगी।  
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मेहता ने कहा कि एमएसएमई के लिए सबसे बड़ी समस्या भुगतान में देरी थी और यह विधेयक इस समस्या का समाधान करना है। इसमें प्रावधान है कि एमएसएमई के भुगतान में 90 दिनों से ज्यादा की देरी नहीं की जा सकती है। यह काफी अच्छा है। 
उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई विवाद होने पर वे मध्यस्थता या आर्बिट्रेशन के लिए जा सकते हैं। मध्यस्थता या आर्बिट्रेशन का फैसला कुछ भी इसका पालन करना होगा।
अगर कोई सरकारी कंपनी इसे चुनौती देना चाहती है तो उसे भुगतान का 75 प्रतिशत जमा करना होगा।  
इसमें यह भी संशोधन किया गया है कि सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को लघु एवं मध्यम उद्यमों से की गई खरीद के सभी बिलों का भुगतान व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली के माध्यम से करना अनिवार्य होगा। इससे एमएसएमई को 6 महीनों तक अपने बिलों के भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और सभी बिलों का भुगतान 90 दिनों के अंदर हो जाएगा।
इस संशोधन से देश में व्यापार में आसानी को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इसमें कई चीजों का गैर-अपराधीकरण भी कर दिया गया है।  
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार को लोकसभा में पारित किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य भुगतान में विलंब की समस्या को समाप्त करना और विवाद निपटारे की प्रक्रिया को आसान बनाना है। 
प्रस्तावित संशोधन में कहा गया कि अगर विवाद के मामले में मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो मध्यस्थता खत्म होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आर्बिट्रेशन के लिए रेफरेंस दिया जाना चाहिए। साथ ही, दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिन में फैसला सुनाना जरूरी है। इसमें ये भी है कि अगर कोई मामला 6 महीने से ज्यादा लटका है तो आपूर्तिकर्ता (एमएसएमई) को तय रकम का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत करना पड़ेगा।
--आईएएनएस
 

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