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पाकिस्तान में बढ़ी गरीबी और इनकम असमानता, महंगाई और बेरोजगारी से ब‍िगड़े हालात: रिपोर्ट

Source : business.khaskhabar.com | Feb 25, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 poverty and income inequality in pakistan inflation and unemployment worsening the situation report 794468नई दिल्ली । सहायता कार्यक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भले ही पाक‍िस्‍तान की तारीफ कर रहा हो, लेक‍िन आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं। डॉन की एक र‍िपोर्ट के अनुसार, ताजा डेटा बताते हैं क‍ि पाक‍िस्‍तान में गरीबी और आय में तेजी से असमानता बढ़ी है, जिससे हालिया सुधारों की सामाजिक लागत को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।  
र‍िपोर्ट के अनुसार, राजकोषीय संतुलन और चालू खाते जैसे प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों में सुधार हुआ है, लेक‍िन लाखों नागरिकों को बढ़ती मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो आर्थिक स्थिरीकरण और आम लोगों की वास्तविक स्थिति के बीच बढ़ती खाई को दर्शाता है।
लंबे समय तक दोहरे घाटे, मुद्रा अस्थिरता और घटते विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति के बाद, मामूली प्राथमिक अधिशेष को भी अब बेहतर राजकोषीय अनुशासन का संकेत माना जा रहा है।
करंट अकाउंट बैलेंस में सुधार से कुछ बाहरी दबाव कम हुआ है। हालांकि, एनालिस्ट बताते हैं कि यह मुख्य रूप से कम इंपोर्ट, ज्‍यादा रेमिटेंस और बाइलेटरल डेट रोलओवर के कारण हुआ, न कि मजबूत एक्सपोर्ट ग्रोथ के कारण। इन उपलब्धियों के बावजूद चिंताएं बरकरार हैं। राजस्व में कमी अब भी सरकार की वित्तीय स्थिति के लिए चुनौती बनी हुई है।
हाल ही में संघीय संवैधानिक न्यायालय द्वारा सुपर टैक्स पर दिए गए फैसले से कुछ अस्थायी राहत मिली है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता के लिए एकमुश्त उपायों पर निर्भर रहने के बजाय कर आधार का विस्तार करना आवश्यक होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ कार्यक्रम के तहत संरचनात्मक सुधारों और अन्य प्रमुख लक्ष्यों पर प्रगति भी धीमी बनी हुई है। इन सुधारों को अल्पकालिक स्थिरीकरण को टिकाऊ आर्थिक विकास में बदलने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
आईएमएफ की गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक रिपोर्ट ने भी रेखांकित किया है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता मजबूत संस्थानों और विश्वसनीय शासन पर काफी हद तक निर्भर करती है। इसी बीच नए आंकड़ों ने स्थिरीकरण उपायों की भारी सामाजिक लागत को उजागर किया है।
हाल के गरीबी के अनुमानों के मुताबिक, लगभग 70 मिलियन पाकिस्तानी अब 8,484 रुपए की महीने की गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। यह रकम बेसिक जरूरतों को भी पूरा नहीं करती है। योजना मंत्री अहसान इकबाल ने आधिकारिक सर्वेक्षण के नतीजे जारी करते हुए कहा कि गरीबी दर बढ़कर लगभग 29 प्रत‍िशत हो गई है, जो 11 वर्षों में सबसे ज्‍यादा है, जबकि 2019 में यह 22 प्रति‍शत से थोड़ी कम थी।
इनकम असामनता भी तेजी से खराब हुई है। असामनता इंडेक्स 32.7 पर पहुंच गया है, जो लगभग तीन दशकों में सबसे ज्‍यादा है, क्योंकि ज्‍यादा महंगाई और आर्थिक मंदी के कारण असली इनकम और घरेलू खपत में गिरावट आई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लेबर मार्केट की स्थिति भी खराब हुई है, जिसमें बेरोजगारी दर बढ़कर 7.1 प्रतिशत हो गई है।
विश्लेषकों की चेतावनी है कि आर्थिक समायोजन का बोझ निम्न और मध्यम आय वर्ग पर अधिक पड़ा है। उनका कहना है कि यदि विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित समानांतर रणनीति नहीं अपनाई गई, तो वर्तमान स्थिरीकरण दीर्घकाल में टिकाऊ नहीं रह पाएगा।
--आईएएनएस
 

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