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बाजार की पाठशाला : शेयर मार्केट में इक्विटी और प्रेफरेंस शेयर क्या होते हैं, दोनों में क्या है अंतर? जानिए कौन सा है बेहतर निवेश विकल्प

Source : business.khaskhabar.com | Feb 11, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 market school what are equity and preferred shares in the stock market what is the difference between them find out which is the better investment option 791194मुंबई । शेयर बाजार में निवेश करते समय ज्यादातर निवेशक केवल रिटर्न पर ध्यान देते हैं, लेकिन सही फैसला लेने के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि आप किस तरह के शेयर में पैसा लगा रहे हैं। खासतौर पर इक्विटी शेयर और प्रेफरेंस शेयर के बीच का अंतर जानना हर निवेशक के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों ही कंपनी में हिस्सेदारी देते हैं, लेकिन इनके अधिकार, जोखिम और मुनाफे का तरीका अलग होता है। अगर आप बिना समझे निवेश करते हैं तो आपके वित्तीय लक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। इसलिए निवेश से पहले इन दोनों के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है। 
इक्विटी शेयर, जिन्हें साधारण या कॉमन शेयर भी कहा जाता है, किसी कंपनी में वास्तविक स्वामित्व का अधिकार देते हैं। जब कोई निवेशक इक्विटी शेयर खरीदता है, तो वह कंपनी का आंशिक मालिक बन जाता है। उसे कंपनी की आम बैठकों में वोट देने का अधिकार मिलता है और बड़े फैसलों में भागीदारी का मौका भी। कंपनी को मुनाफा होने पर इक्विटी शेयरधारकों को डिविडेंड मिलता है, लेकिन यह तय नहीं होता। 
डिविडेंड कंपनी के प्रदर्शन और बोर्ड के निर्णय पर निर्भर करता है। कंपनी के सभी खर्च और देनदारियां चुकाने के बाद जो लाभ बचता है, उसी में से इक्विटी निवेशकों को हिस्सा मिलता है। यही वजह है कि इक्विटी में रिटर्न की संभावना अधिक होती है, लेकिन जोखिम भी ज्यादा रहता है।
वहीं, प्रेफरेंस शेयर निवेशकों को प्राथमिकता का अधिकार देते हैं। इसका मतलब है कि कंपनी जब डिविडेंड बांटती है तो सबसे पहले प्रेफरेंस शेयरधारकों को भुगतान किया जाता है। इसके अलावा, यदि कंपनी बंद होती है और उसकी संपत्तियां बेची जाती हैं, तो भी उन्हें इक्विटी निवेशकों से पहले भुगतान मिलता है। आमतौर पर प्रेफरेंस शेयर पर डिविडेंड की दर तय होती है, जिससे निवेशकों को अपेक्षाकृत स्थिर आय मिलती है। हालांकि, इन शेयरधारकों को सामान्य परिस्थितियों में वोटिंग का अधिकार नहीं मिलता।
दोनों के बीच मुख्य अंतर अधिकार और जोखिम का है। इक्विटी निवेशक ज्यादा जोखिम उठाते हैं, लेकिन लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। प्रेफरेंस शेयर अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं और निश्चित डिविडेंड देते हैं, लेकिन इनमें ग्रोथ की संभावना सीमित रहती है।
इसलिए, यदि कोई निवेशक लंबी अवधि में मोटा पैसा कमाना चाहता है और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकता है, तो इक्विटी शेयर बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं, जो निवेशक स्थिर आय और कम जोखिम पसंद करते हैं, उनके लिए प्रेफरेंस शेयर उपयुक्त साबित हो सकते हैं। सही चुनाव निवेशक के वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।


--आईएएनएस
 

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