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'तेजी से बंटती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत एक मजबूत तीसरे ध्रुव के रूप में उभर रहा है'

Source : business.khaskhabar.com | Feb 11, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india is emerging as a strong third pole in an increasingly fragmented global economy 791193नई दिल्ली । वॉशिंगटन स्थित ऑनलाइन प्रकाशन 'द नेशनल इंटरेस्ट' में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, अमेरिका, चीन और रूस द्वारा बनाए जा रहे शत्रुतापूर्ण माहौल में यूरोप और कनाडा के पास भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने के अलावा कोई बेहतर विकल्प नहीं है। 
डॉ. जियानली यांग द्वारा लिखे गए इस लेख में कहा गया है कि चीन से जोखिम कम करने और अमेरिका की अनिश्चित नीतियों से बचाव के बीच फंसा यूरोप अब भारत को एक रणनीतिक विकल्प के रूप में देख रहा है। भारत के पास बड़ा बाजार और उत्पादन क्षमता है, लेकिन चीन जैसी भू-राजनीतिक जटिलताएं नहीं हैं। 
भारत न तो अमेरिका जैसा सुरक्षा सहयोगी है और न ही चीन जैसा बड़ा मैन्युफैक्चरिंग केंद्र, लेकिन तेजी से बंटती वैश्विक अर्थव्यवस्था में वह एक मजबूत तीसरे ध्रुव के रूप में उभर रहा है।
लेख में बताया गया है कि कनाडा भी यूरोप जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चीन के साथ सावधानीपूर्वक बातचीत शुरू की है, ताकि वह अपने व्यापारिक संबंधों को विविध बना सके और केवल अमेरिका पर निर्भर न रहे। हालांकि कनाडा और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों में तनाव रहा है, फिर भी कनाडा भविष्य में भारत को एक व्यावहारिक साझेदार के रूप में देख सकता है।
लेख में कहा गया है कि यूरोप और भारत ने हाल ही में व्यापार समझौता किया है, अमेरिका और भारत के बीच एक फ्रेमवर्क डील बनी है और कनाडा भी उसी दिशा में आगे बढ़ सकता है। इससे एक नया वैश्विक व्यवस्था बनती दिख रही है, जिसमें भारत अटलांटिक के दोनों किनारों को जोड़ने वाला व्यापारिक, रणनीतिक और राजनीतिक सेतु बन रहा है।
भारत इस भूमिका में इसलिए फिट बैठता है क्योंकि वह तेजी से अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है और चीन से हटकर आने वाले निवेश को आकर्षित कर रहा है। अमेरिका में बिकने वाले अधिकांश आईफोन अब भारत में बन रहे हैं, जो वैश्विक बदलाव का प्रतीक है। साथ ही, भारत में अपेक्षाकृत कम श्रम लागत, बेहतर होती कानूनी व्यवस्था, तकनीकी क्षमता और बड़ा घरेलू बाजार उसकी ताकत हैं।
लेख में यह भी कहा गया है कि भारत के पास एक और बड़ी खासियत है, जो चीन में नहीं है-लोकतांत्रिक व्यवस्था। भले ही उसकी संस्थाएं पूरी तरह परिपूर्ण न हों, लेकिन चुनाव, न्यायालय और सिविल सोसाइटी जैसी व्यवस्थाएं यूरोप और उत्तरी अमेरिका के साथ राजनीतिक समानता बनाती हैं। भारत की युवा, अंग्रेजी बोलने वाला कार्यबल और बढ़ती क्रय शक्ति भी उसे लंबी अवधि में आकर्षक बनाती है। चीन के साथ उसकी प्रतिद्वंद्विता और रणनीतिक स्वायत्तता की नीति भी उसे पश्चिमी देशों के करीब लाती है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत की संरक्षणवादी नीतियां, नौकरशाही की सुस्ती और स्वायत्तता पर जोर यूरोप और कनाडा के लिए चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। लेकिन आज की अविश्वास और अस्थिरता से भरी वैश्विक व्यवस्था में भारत की लचीलापन-यानी सभी पक्षों से संबंध बनाए रखने की क्षमता-उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। 
लेख में दावा किया गया है कि जैसे-जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी विदेश नीति में बदलाव कर रहे हैं और पारंपरिक सहयोगियों से टकराव बढ़ रहा है, भारत अनजाने में एक ऐसे सेतु के रूप में उभर रहा है, जो बंटती हुई अटलांटिक दुनिया को जोड़े रखता है।


--आईएएनएस
 

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