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भारत और यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, भारतीय निर्यात और पेशेवरों को बड़ा फायदा

Source : business.khaskhabar.com | Jun 18, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india uk trade agreement to come into effect on july 15 major boost for indian exports and professionals 822224नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने बुधवार को घोषणा करते हुए जानकारी दी कि कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू होगा। इसके साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया दौर शुरू होने जा रहा है।
 
इसी दिन सोशल सिक्योरिटी पर एग्रीमेंट, जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) कहा जाता है, वो भी लागू होगा। इससे यूके में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को अधिक सुविधा मिलेगी और कॉम्पिटिटिवनेस प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, डीसीसी के तहत मिलने वाली छूट की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। यह यूके में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, "भारत-यूके संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।"
उन्होंने आगे कहा, "इससे भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वालों के लिए कई नए अवसर खुलेंगे। यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। मैं और प्रधानमंत्री स्टार्मर हमारे आर्थिक संबंधों को मिली इस नई गति से बेहद खुश हैं।"
इस ऐतिहासिक समझौते की नींव मई 2021 में रखी गई थी, जब दोनों देशों ने एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप और इंडिया-यूके रोडमैप 2030 को अपनाया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाना और 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "15 जुलाई 2026 से सीईटीए और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के एक साथ लागू होने से भारत के निर्यात के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। हमारे 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से लंबे समय से मौजूद शुल्क संबंधी बाधाएं खत्म हो जाएंगी।"
उन्होंने कहा कि इससे भारत के वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को बराबरी का अवसर मिलेगा और वे अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बिना किसी नुकसान के वैश्विक बाजार में बेच सकेंगे।
30 अध्यायों वाले सीईटीए को नई पीढ़ी के व्यापार समझौतों का एक नया मॉडल माना जा रहा है। यह सीधे तौर पर भारत के 'विकसित भारत 2047' के विजन को समर्थन देता है।
यह समझौता केवल आयात-निर्यात शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है। इसमें डिजिटल व्यापार, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार और पहली बार द्विपक्षीय स्तर पर सरकारी खरीद जैसे आधुनिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, सीईटीए और डीसीसी के एक साथ लागू होने से भारत की वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़ा और संरचनात्मक बदलाव आएगा। साथ ही भारत ने डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है।
--आईएएनएस 

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