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आधुनिक चुनौतियों के समाधान में प्राचीन ज्ञान और परंपराएं होंगी अहम : एक्सपर्ट्स

Source : business.khaskhabar.com | Nov 02, 2026 | businesskhaskhabar.com Gadget News Rss Feeds
 ancient wisdom and traditions will be crucial in addressing modern challenges experts 858182वाराणसी। 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय विश्व संगोष्ठी में शामिल शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और विद्वानों ने मौजूदा चुनौतियों से निपटने में सदियों पुरानी परंपराओं के उपयोग के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, युवाओं के साथ संवाद और चर्चा करने की आवश्यक बताया। 

सोमवार को वाराणसी में आयोजित इस कार्यक्रम में दुनिया भर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने आईएएनएस से बातचीत में अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी द्वारा प्रस्तुत 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान की प्रासंगिकता' के विचार का समर्थन किया।

'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' विषय पर विश्व संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य संबोधन देते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, "प्राचीन ज्ञान केवल इसलिए मूल्यवान नहीं हो जाता क्योंकि वह प्राचीन है। वह तब मूल्यवान बनता है, जब हम समकालीन समस्याओं के लिए उसकी प्रासंगिकता को समझते हैं।" 

उन्होंने सभ्यतागत ज्ञान को संरक्षित करने और उसका उपयोग पीड़ा, असमानता तथा संघर्ष जैसी समस्याओं से निपटने के लिए करने का आह्वान किया।

नीदरलैंड स्थित यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र की एसोसिएट प्रोफेसर चियारा रोबियानो ने कहा, "हमें एक-दूसरे के साथ समय बिताने और यह समझने में सक्षम होना चाहिए कि किसी भी समय हमारा व्यक्तित्व हमारे बीच होने वाली घटनाओं से आकार लेता है। संवाद के माध्यम से हम नए व्यक्तित्व के रूप में उभरते हैं। इसलिए, हम किस तरह संवाद करते हैं और दूसरों के ज्ञान के प्रति कितने ग्रहणशील रहते हैं, यह बेहद महत्वपूर्ण है।"

प्रिटोरिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर जहरा मैकडोनाल्ड ने कहा, "यह इन संस्कृतियों को आधुनिक शिक्षा में शामिल करने के बारे में है। हम गणित और पढ़ने-पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते रहे हैं और यह महत्वपूर्ण भी है। हम इन विषयों की उपेक्षा नहीं कर सकते।"

संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क (एसडीएसएन) के अध्यक्ष जेफरी सैश ने कहा, "अदाणी समूह एक बहुत बड़ा कारोबारी समूह है और भारत में बदलाव लाने वाले प्रमुख समूहों में से एक है। जब हम भारत की बहुत तेज आर्थिक वृद्धि को देखते हैं, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, तो इसमें बुनियादी ढांचे के विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है और अदाणी समूह इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है।"

अमेरिकी दार्शनिक थैडियस मेट्ज ने कहा, "समकालीन समस्याओं से निपटने के लिए पुरानी परंपराओं से सीख लेना उपयोगी है, क्योंकि उनमें ज्ञान समाहित है। यदि विचारों की कोई परंपरा कई सदियों तक प्रासंगिक बनी रही है, तो निश्चित रूप से उसमें मानवीय स्थिति और चीजों को बेहतर बनाने के तरीकों से जुड़े मूल्यवान विचार मौजूद हैं।"

चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन (सीआईएफ) की अकादमिक निदेशक गौरी महुलीकर ने कहा, "जिस तरह हम ऐसे परिवार में रहते हैं, जहां कुछ सदस्य कमाते हैं और कुछ नहीं, उसी तरह एक समय था जब परिवारों में 20 या उससे अधिक सदस्य हुआ करते थे। मुझे याद है कि मेरे विस्तारित परिवार में ऐसे कई लोग थे, जिन्हें हम बच्चे मुश्किल से जानते थे, फिर भी हम उनसे मिलने जाया करते थे। यदि हम एक-दूसरे के प्रति भी यही भावना विकसित करें, तो संघर्ष का कोई सवाल ही नहीं उठेगा।"

इस आयोजन के लिए वाराणसी को चुने जाने का कारण बताते हुए कोलंबिया विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री और प्रोफेसर निरुपम बाजपेयी ने कहा, "यह संगोष्ठी का तीसरा संस्करण है। इससे पहले हम दो संगोष्ठियों का आयोजन कर चुके हैं, जिनमें से एक ग्रीस और दूसरी चीन में हुई थी। भारत में पहली बार इसका आयोजन किया जा रहा है। वाराणसी को इसलिए चुना गया क्योंकि इसका हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से विशेष जुड़ाव है।"

उन्होंने आगे कहा, "मेरा मानना है कि भारत में इस आयोजन की मेजबानी के लिए वाराणसी से अधिक उपयुक्त कोई दूसरी जगह नहीं हो सकती। हमने शुरुआत से ही वाराणसी पर विचार किया था और इसी के अनुरूप संगोष्ठी का केंद्र इन तीनों धर्मों को बनाया गया है।"

--आईएएनएस

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