गेहूं बाजार में ग्लोबल जैसा लोकल संकट: MSP से ₹100 नीचे खुले भाव, सरकारी खरीद ठप
Source : business.khaskhabar.com | Apr 16, 2026 | 
बिजनेस डेस्क/जयपुर देश में इस साल गेहूं के बंपर उत्पादन के अनुमानों के बीच, मंडियों से आ रही खबरें किसानों और बाजार विश्लेषकों के लिए चिंता का सबब बन गई हैं। अप्रैल का आधा महीना बीतने के बाद भी सरकारी खरीद की रफ्तार सुस्त है, जिसका सीधा असर खुले बाजार की कीमतों पर पड़ रहा है। आलम यह है कि मिल डिलीवरी 'दड़ा' गेहूं के भाव फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ₹100 प्रति क्विंटल तक नीचे बोले जा रहे हैं।
सरकार ने चालू विपणन वर्ष के लिए गेहूं का MSP ₹160 बढ़ाकर ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया था। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने तो बोनस के साथ इसे ₹2625 तक पहुँचा दिया। लेकिन धरातल पर स्थिति जुदा है।
वीकेआई एरिया, जयपुर स्थित मित्तल दलिया के निर्माता मुकुल मित्तल के अनुसार, अनुकूल मौसम और अधिक बिजाई के कारण इस बार देश में 1150 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले साल के 1090 लाख टन से काफी अधिक है। आपूर्ति के इस भारी दबाव के बीच सरकारी खरीद तंत्र का कमजोर पड़ना खुले बाजार में कीमतों को तोड़ रहा है। फिलहाल 'नैट' मिल डिलीवरी के भाव ₹2500 के आसपास चल रहे हैं।
बिजनेस एंगेल से सबसे बड़ा चिंता का विषय प्रमुख उत्पादक राज्यों की स्थिति है। उत्तर प्रदेश में खरीद न के बराबर है, जबकि हरियाणा और पंजाब में भी अभी प्रक्रिया गति नहीं पकड़ पाई है। राजस्थान में सरकारी खरीद अत्यंत सीमित है।
मंडियों से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार, अधिकांश क्रय केंद्रों पर 'बारदाने' का भारी अभाव है। जब तक सरकारी गोदामों के दरवाजे तेजी से नहीं खुलते, तब तक निजी व्यापारी और रोलर फ्लोर मिलें आक्रामक तरीके से ऊँची कीमतों पर खरीदारी नहीं करेंगे।
सूत्रों का मानना है कि यदि अगले एक सप्ताह में सरकारी खरीद केंद्रों पर बारदाने की उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया सुचारू नहीं हुई, तो मंडियों में आवक बढ़ने के साथ ही खुले बाजार में गेहूं की कीमतें और अधिक दबाव में आ सकती हैं। सरकार को तुरंत चारों तरफ खरीद की समुचित व्यवस्था कर बाजार सेंटीमेंट को सुधारना होगा।
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