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बढ़ती महंगाई और महंगे कच्चे तेल के बीच आरबीआई पर बढ़ा दबाव, ब्याज दरें स्थिर रखना हो सकता है मुश्किल: रिपोर्ट

Source : business.khaskhabar.com | Sep 29, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 rising inflation and costly crude oil put pressure on rbi making it difficult to keep interest rates stable report 848935
बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 

बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के दबाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मंगलवार को जारी बीएनपी परिबास इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के सप्ताहों में भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य कुछ कमजोर हुआ है, जिससे मौद्रिक नीति पर दबाव बढ़ सकता है। 

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जबकि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। इसके साथ ही दुनिया भर में महंगाई के दबाव बने हुए हैं और कई केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि का रास्ता अपना रहे हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (एफसीएनआर) जमा के जरिए अपने बाहरी क्षेत्र को मजबूत किया है, लेकिन विकसित देशों में बढ़ती ब्याज दरों के कारण पूंजी निकासी का जोखिम भी बढ़ गया है। ऐसे माहौल में आरबीआई के लिए नीतिगत दरों को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखना कठिन हो सकता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि निकट अवधि में भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी कारण रुपए पर दबाव बढ़ा है और आरबीआई के पास ब्याज दरें अपरिवर्तित रखने की गुंजाइश सीमित होती जा रही है। बीएनपी परिबास इंडिया के भारतीय इक्विटी अनुसंधान प्रमुख कुणाल वोरा ने कहा कि भारत का व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण तेल कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील है और पश्चिम एशिया में ताजा तनाव देश के लिए नकारात्मक संकेत लेकर आया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में रुपया लगभग 1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। वहीं भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली भी फिर शुरू हो गई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को एफसीएनआर जमा से समर्थन मिला है। अनुमानतः लगभग 127 अरब डॉलर के एफसीएनआर प्रवाह की मदद से विदेशी मुद्रा भंडार करीब 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इससे निकट अवधि में कुछ राहत मिली है, लेकिन ये प्रवाह अगले तीन से पांच वर्षों में वापस भी जा सकते हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची महंगाई का असर आने वाले महीनों में उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों पर दिखाई दे सकता है। शहरी क्षेत्रों में मजदूरी वृद्धि में कमी, बढ़ती महंगाई और कारोबारी विश्वास में गिरावट जैसे संकेत उपभोग मांग पर असर डाल सकते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 

मानसून की कमी, खाद्य मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी और फसल बुआई में कमी के कारण ग्रामीण मांग पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद रिपोर्ट ने कुछ सकारात्मक पहलुओं की भी ओर संकेत किया है। इनमें मजबूत ऋण वृद्धि, ऑटो बिक्री में मजबूती, रोजगार संबंधी आंकड़ों में सुधार और खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार शामिल है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में सहायक हो सकते हैं। -आईएएनएस

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