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कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बाजार पर दबाव, सप्ताहभर में सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई 0.83 प्रतिशत तक गिरावट

Source : business.khaskhabar.com | Aug 15, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 rising crude oil prices put pressure on the market with sensex and nifty falling by 083 percent in a week 836851
बिजनेस डेस्क। मुंबई 

भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दो हफ्तों की बढ़त के बाद इस सप्ताह कमजोरी के साथ कारोबार समाप्त किया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला। सप्ताह के दौरान निफ्टी 0.83 प्रतिशत टूटकर 24,366 अंक पर बंद हुआ। वहीं, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन निफ्टी में 0.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, सेंसेक्स 70 अंक यानी 0.09 प्रतिशत फिसलकर 78,009 अंक पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 0.62 प्रतिशत की गिरावट रही।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के श्रम बाजार से जुड़े अपेक्षा से कमजोर आंकड़ों ने शुरुआत में यह उम्मीद जगाई थी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपना सकता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में आई नई तेजी ने महंगाई संबंधी चिंताओं को फिर बढ़ा दिया और निवेशकों का ध्यान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों की ओर केंद्रित हो गया। इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू स्तर पर कुछ सकारात्मक कारकों से सपोर्ट मिला। उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजों, रुपए में स्थिरता, 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भागीदारी में धीरे-धीरे सुधार ने बाजार को बड़ा नुकसान होने से बचाया। 

कंपनियों के तिमाही नतीजे भी काफी मजबूत रहे। निफ्टी-50 की 33 कंपनियों ने बाजार के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की कमाई मजबूत बनी हुई है और निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में अवसर मौजूद हैं। सप्ताह के दौरान बड़े शेयरों (लार्ज-कैप) पर पश्चिम एशिया के तनाव का असर देखने को मिला। हालांकि, मिडकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया और प्रमुख सूचकांकों से आगे रहे। बेहतर आय संभावनाओं के कारण निवेशकों की रुचि मिडकैप कंपनियों में बनी रही। 

क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। घरेलू मांग में सुधार और आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक उम्मीदों ने इन क्षेत्रों को समर्थन दिया। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू बैंक्स) मजबूत एसेट क्वालिटी, आकर्षक वैल्यूएशन और बेहतर क्रेडिट ग्रोथ आउटलुक के कारण अपेक्षाकृत मजबूती में रहे। दूसरी ओर, मेटल, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। 

निवेशकों को इन क्षेत्रों में बढ़ती इनपुट लागत और कच्चे माल की कीमतों को लेकर चिंता रही। व्यापक बाजार का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों से अलग रहा। निफ्टी मिडकैप-100 और निफ्टी स्मॉलकैप-100 सूचकांकों में सप्ताह के दौरान 0.50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो निवेशकों की मिड और स्मॉलकैप शेयरों में जारी रुचि को दर्शाता है। 

आगे की दिशा के लिए निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों, अमेरिका के रिटेल बिक्री आंकड़ों, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के मिनट्स और चीन के आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन कारकों से वैश्विक आर्थिक वृद्धि और अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं, जिनका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा। -आईएएनएस

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