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पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार से जुड़े मुद्दों पर कर सकते हैं चर्चा

Source : business.khaskhabar.com | Sep 12, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 pm modi and president xi may discuss trade related issues in bilateral talks 844254
बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार शाम को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार और निवेश के मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें चीन के साथ भारत के बड़े व्यापार घाटे पर फोकस किया जाएगा। 

2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 14.25 अरब डॉलर था। हालांकि, आयात 16.03 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया, जो पहले 113.46 अरब डॉलर था। इसके चलते, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2024-25 के 99.21 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 112.16 अरब डॉलर हो गया। 2025-26 में चीन के साथ भारत का वस्तु व्यापार 18.31 प्रतिशत बढ़कर 151.10 अरब डॉलर हो गया। 

साथ ही, अब चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने का स्थान भी हासिल कर लिया है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत का व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ा है। यह 2023-24 में 83.2 अरब डॉलर, 2022-23 में 73.3 अरब डॉलर और 2021-22 में 44 अरब डॉलर था, जिससे दोनों देशों के बीच अधिक संतुलित और टिकाऊ व्यापार की दिशा में काम करने का मुद्दा सामने आता है। 

व्यापार असंतुलन सिर्फ भारत में आने वाले कंज्यूमर गुड्स का मामला नहीं है। चीन से भारत के आयात का एक बड़ा हिस्सा जरूरी इंडस्ट्रियल इनपुट, कंपोनेंट्स और कैपिटल गुड्स का होता है, जिनका इस्तेमाल भारतीय मैन्युफैक्चरर्स सामान बनाने और नौकरियां पैदा करने के लिए करते हैं। इसमें मुख्य सेक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और ऑर्गेनिक केमिकल्स हैं और आयात का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा हैं। 

जीटीआरआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का लगभग 43 प्रतिशत और मशीनरी व कंप्यूटर आयात का 40 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करता है। इससे ये मुख्य इनपुट घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिए बहुत जरूरी हो जाते हैं, न कि सिर्फ लोगों की पसंद पर निर्भर कंज्यूमर खरीदारी के लिए। 

भारत चीन से छह मुख्य जरूरी मिनरल्स का 40 प्रतिशत से ज्यादा आयात भी करता है, जिससे उसकी रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और डिफेंस सप्लाई चेन में बड़ी कमजोरियां सामने आती हैं। असल में, अगर चीन भारत को इन चीजों का निर्यात रोकता है, तो सप्लाई चेन में रुकावट आती है। 

जीटीआरआई रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि इस स्ट्रक्चरल असंतुलन की वजह से भारत के क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल सेक्टर सप्लाई चेन में रुकावट या जरूरी रॉ मटीरियल पर पाबंदियों के जोखिम का सामना करते हैं। वहीं, चीन भारत से निवेश नियमों में ढील की उम्मीद करेगा ताकि उसकी कंपनियां तेजी से बढ़ रहे भारतीय बाजार में निवेश कर सकें। -आईएएनएस

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