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मजबूत इकोसिस्टम और एआई तय करेंगे भारत में जीसीसी का अगला दौर: गिफ्ट सिटी सीईओ

Source : business.khaskhabar.com | July 10, 2026 | businesskhaskhabar.com Gadget News Rss Feeds
 a strong ecosystem and ai will determine the next phase of gccs in india gift city ceo 827748नई दिल्ली । गिफ्ट सिटी के ग्रुप सीईओ और प्रबंध निदेशक संजय कौल ने गुरुवार को कहा कि भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) का अगला चरण केवल लोकेशन या टैक्स प्रोत्साहनों (इंसेंटिव) पर नहीं, बल्कि मजबूत इकोसिस्टम पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और नवाचार को बढ़ावा देने वाला नियामकीय ढांचा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। 
राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित दूसरे राष्ट्रीय जीसीसी बिजनेस समिट के दौरान "द इवॉल्विंग जीसीसी इकोसिस्टम: की इनसाइट्स" विषय पर आयोजित सत्र में संजय कौल ने कहा कि एआई के लगभग हर उद्योग में प्रवेश करने के साथ एक मजबूत और समग्र इकोसिस्टम की जरूरत बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, "एआई अब लगभग हर उद्योग का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मजबूत कनेक्टिविटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वाला इकोसिस्टम जरूरी है। साथ ही ऐसा नियामकीय ढांचा भी होना चाहिए, जहां नवाचार को बढ़ावा मिले। गिफ्ट सिटी में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।"
संजय कौल ने कहा कि यदि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का इकोसिस्टम विकसित किया जाता है तो जीसीसी क्षेत्र को और तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में वैश्विक कंपनियां केवल कर प्रोत्साहनों या लोकेशन को नहीं देखेंगी, बल्कि ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देंगी जहां पूरा कारोबारी इकोसिस्टम एक-दूसरे को मजबूती देता हो।
उन्होंने कहा, "अगली पीढ़ी के जीसीसी केवल लोकेशन या इंसेंटिव के आधार पर फैसला नहीं करेंगे। वे ऐसे मजबूत इकोसिस्टम की तलाश करेंगे, जहां हर व्यवस्था एक-दूसरे का सहयोग करे और पूरा सिस्टम एक सतत शृंखला की तरह काम करे।"
कौल ने कहा कि शुरुआत में वैश्विक कंपनियां भारत में बड़ी संख्या में उपलब्ध प्रतिभाशाली पेशेवरों (टैलेंट पूल) की वजह से आई थीं, लेकिन अब वे भारत की बढ़ती क्षमताओं और नवाचार को समर्थन देने वाले व्यापक इकोसिस्टम से भी आकर्षित हो रही हैं, जिससे भारत वैश्विक कंपनियों के लिए पहले से अधिक पसंदीदा गंतव्य बन गया है।
उनके अनुसार, अब कंपनियां ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दे रही हैं जहां उच्च गुणवत्ता वाला इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी, स्थिर और पारदर्शी नियम, अच्छी जीवनशैली और नवाचार के अवसर उपलब्ध हों, न कि केवल कर रियायतें।
इस सत्र में विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चर्चा की कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा जीसीसी केंद्र बनकर उभर रहा है। उनका कहना था कि भारत केवल कम लागत (कॉस्ट आर्बिट्राज) का केंद्र नहीं रहा, बल्कि अब क्षमता आधारित प्रतिस्पर्धा (कैपेबिलिटी आर्बिट्राज) से आगे बढ़कर 'कंट्रोल आर्बिट्राज' के दौर में प्रवेश कर चुका है। इसका मतलब है कि वैश्विक कंपनियां अब भारतीय जीसीसी को केवल परिचालन कार्य ही नहीं, बल्कि रणनीतिक फैसलों और पूरे संगठन के परिवर्तन (एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन) की जिम्मेदारी भी सौंप रही हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि जीसीसी अब केवल काम पूरा करने वाले केंद्र नहीं रह गए हैं। वे तेजी से इनोवेशन और एआई ट्रांसफॉर्मेशन हब में बदल रहे हैं। जैसे-जैसे कंपनियां एआई-आधारित मॉडल अपनाएंगी, जीसीसी पूरे संगठन की प्रक्रियाओं में बदलाव, एआई-आधारित समाधान विकसित करने, कर्मचारियों को नए कौशल सिखाने और वैश्विक स्तर पर कारोबार में नवाचार लाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।


--आईएएनएस 

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