वेदांता के शेयरों में रिकॉर्ड तेजी : कोटक ने 965 रुपए तक का दिया टारगेट, डीमर्जर और मेटल की कीमतों से मिलेगा बूस्ट
Source : business.khaskhabar.com | Jan 21, 2026 | 

नई दिल्ली | कमोडिटी बाजार में आई तेजी और कंपनी के आंतरिक पुनर्गठन की खबरों के बीच वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) के शेयरों ने शेयर बाजार में नया इतिहास रच दिया है। प्रमुख ब्रोकरेज हाउसेज ने कंपनी के भविष्य को लेकर बेहद सकारात्मक रुख अपनाया है, जिसके बाद इसके शेयरों में भारी लिवाली देखी जा रही है।
एल्युमीनियम और सिल्वर की चमक से बढ़ी प्रॉफिटेबिलिटी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वेदांता की इस तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में आया उछाल सबसे बड़ा कारण है। पिछली तिमाही में एल्युमीनियम और जिंक की कीमतों में 8–12% की वृद्धि हुई है, जबकि चांदी (Silver) की कीमतों में करीब 40% का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 तक वेदांता के कुल एबिट्डा (EBITDA) का लगभग 85% हिस्सा एल्युमीनियम, जिंक और सिल्वर से आने की उम्मीद है।
कोटक और नुवामा का बुलिश आउटलुक
ब्रोकरेज हाउसेज ने वेदांता के भविष्य के लिए अपने अनुमानों को अपडेट किया है:
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज: ब्रोकरेज ने वेदांता का फेयर वैल्यू बढ़ाकर ₹780 कर दिया है। हालांकि, कोटक ने यह भी कहा कि यदि मौजूदा 'स्पॉट कीमतें' स्थिर रहती हैं, तो यह वैल्यू ₹965 तक जा सकती है।
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज: नुवामा ने Q3 में कंपनी के एबिट्डा में 28% की तिमाही वृद्धि का अनुमान लगाया है। इसका मुख्य श्रेय परिचालन दक्षता (Operating Leverage) और एल्युमीनियम की उच्च कीमतों (USD 2,829/टन) को दिया गया है।
डीमर्जर से होगा वैल्यू अनलॉकिंग का फायदा
वेदांता अपने कारोबार को पांच अलग-अलग लिस्टेड संस्थाओं में विभाजित (Demerger) करने की प्रक्रिया में है। कोटक के अनुसार, यह प्रक्रिया वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में शुरू होकर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक पूरी हो सकती है। इस कदम से एल्युमीनियम और पावर जैसे क्षेत्रों में निवेशकों को बेहतर वैल्यू मिलने की उम्मीद है।
PSU माइनिंग शेयरों पर दबाव: NMDC और कोल इंडिया पिछड़ेजहां एक ओर वेदांता रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की माइनिंग कंपनियों के लिए परिदृश्य थोड़ा चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है:
NMDC : कम रियलाइजेशन के चलते एबिट्डा में सालाना आधार पर 15% की गिरावट की आशंका है। प्रति टन रियलाइजेशन भी 14% तक घट सकता है।
कोल इंडिया : वॉल्यूम में 4% की कमी और ब्लेंडेड रियलाइजेशन में गिरावट के कारण एबिट्डा में 14% की कमी का अनुमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नॉन-फेरस मेटल उत्पादकों (जैसे वेदांता और हिंदुस्तान जिंक) के लिए आने वाला समय बेहतर रहेगा, जबकि वॉल्यूम और प्राइसिंग के दबाव के कारण कोल और आयरन ओर सेक्टर की पीएसयू कंपनियों को संघर्ष करना पड़ सकता है।
[@ इस ऑफिस में अपने आप चलती हैं कुर्सियां!
]
[@ अनूठा कारनामा, महिला ने बालों से बनाया कोट]
[@ कोमा से बाहर आते ही बोलने लगा दूसरे देश की भाषा]