सेबी ने ट्रेडिंग नियमों को आसान बनाने के लिए दिया नया प्रस्ताव, अनुपालन का बोझ कम होगा
Source : business.khaskhabar.com | Jan 10, 2026 | 

मुंबई । बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ट्रेडिंग से जुड़े नियमों का आसान बनाने के लिए नया प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग से जुड़े फ्रेमवर्क में बदलाव लाना, नियमों को आसान बनाना और बाजार के भागीदारों के लिए अनुपालन का बोझ कम करना है।
नए प्रस्ताव के जरिए सेबी की कोशिश स्टॉक एक्सचेंज और कमोडिटी एक्सचेंज दोनों में व्यापार में आसानी को बढ़ावा देना है।
सेबी की ओर से जारी किए गए कंसल्टेशन पेपर में ट्रेडिंग, प्राइस बैंड, सर्किट ब्रेकर, बल्क और ब्लॉक डील डिस्क्लोजर, कॉल ऑक्शन और लिक्विडिटी बढ़ाने की स्कीम पर दोहराव लाने वाले प्रावधानों को विलय करने की सिफारिश की गई है।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि कुछ 54 नियमों में बदलाव की सिफारिश की गई है। इसमें इक्विटी और कमोडिटी सेगमेंट दोनों को एकल ढांचे में कवर करने वाले नियम शामिल हैं। इस विलय में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (एमटीएफ), विशिष्ट क्लाइंट कोड, पैन की आवश्यकताएं, ट्रेडिंग घंटे और दैनिक मूल्य सीमा से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।
बयान में आगे कहा गया कि बल्क डील और ब्लॉक डील से संबंधित डिस्क्लोजर प्रावधानों को आपस में मिलाया जा सकता है। बल्क डील डिस्क्लोजर पर और स्पष्टता प्रदान की जा सकती है। इसका मतलब है कि सदस्य एक्सचेंजों के बीच पूरी होने वाली बल्क डील की जानकारी ग्राहक स्तर पर एक्सचेंजों द्वारा प्रसारित की जाएगी।
नियामक ने कहा कि क्लियरिंग कॉरपोरेशंस पर लगने वाले प्रावधानों के लिए एक अलग से मास्टर सर्कुलर लाया जाएगा, जिससे रेगुलेटरी ओवललैप को समाप्त किया जा सके।
बयान में आगे कहा गया, "एक्सचेंजों और क्लियरिंग निगमों द्वारा क्लाइंट कोड और ओटीआर आवंटन में संशोधन के लिए लगाए गए जुर्माने एक समान होने चाहिए।"
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इससे पहले परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से वित्तीय क्षेत्र के प्रतिभागियों के लिए अनुपालन को सरल बनाने, आसान बनाने और लागत कम करने की घोषणा की थी।
--आईएएनएस
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