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बाजार की पाठशाला : शेयर बाजार में डिविडेंड, बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट क्या होता है? निवेशकों के लिए जानना बड़ा ही जरूरी 

Source : business.khaskhabar.com | Jan 07, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
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मुंबई । शेयर बाजार में कुछ ऐसे शब्द हैं जिनके बारे में निवेशकों के लिए जानना बड़ा ही जरूरी होता है, क्योंकि उनका सीधा असर उनकी कमाई और निवेश की वैल्यू पर पड़ सकता है। इनमें डिविडेंड, बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट सबसे अहम माने जाते हैं। इन तीनों को सही तरीके से समझना हर निवेशक के लिए जरूरी है। 
डिविडेंड वह हिस्सा होता है जो कंपनी अपने मुनाफे में से अपने शेयरधारकों को देती है। जब कोई कंपनी अच्छा मुनाफा कमाती है और भविष्य के लिए पैसा बचाने के बाद कुछ रकम शेयरधारकों में बांटती है, तो उसे 'डिविडेंड' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी ने 10 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड घोषित किया है और आपके पास उस कंपनी के 100 शेयर हैं, तो आपको कुल 1,000 रुपए का फायदा होगा जो डिविडेंड के रूप में आपको मिलेंगे।
वहीं, जब कोई कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को बिना किसी अतिरिक्त पैसे के नए शेयर देती है, तो उसे 'बोनस इश्यू या बोनस शेयर' कहा जाता है। यह भी कंपनी के मुनाफे से ही दिया जाता है, लेकिन इसमें नकद की जगह शेयर मिलते हैं। मान लीजिए किसी कंपनी ने 1:1 के अनुपात में बोनस इश्यू की घोषणा की। तो इसका मतलब है कि अगर आपके पास उस कंपनी के 50 शेयर हैं, तो आपको 50 अतिरिक्त शेयर मुफ्त में मिल जाएंगे।
वहीं, जब कंपनी अपने एक शेयर को कई छोटे हिस्सों में बांटती है, तो उसे 'स्टॉक स्प्लिट' कहा जाता है। इसके पीछे की वजह यह है कि उस कंपनी के शेयर की कीमत कम हो जाए और ज्यादा लोग उसे खरीद सकें। इसमें शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन निवेश की कुल वैल्यू वही रहती है। जैसे, अगर किसी कंपनी का एक शेयर 1,000 रुपए का है और कंपनी 1:2 का स्टॉक स्प्लिट करती है, तो आपका एक शेयर दो शेयरों में बदल जाएगा और हर शेयर की कीमत करीब 500 रुपए हो जाएगी।
इस तरह, डिविडेंड में निवेशकों को नकद पैसा मिलता है। बोनस इश्यू में बिना पैसे दिए अतिरिक्त शेयर मिलते हैं, जबकि स्टॉक स्प्लिट में शेयरों की संख्या बढ़ती है, लेकिन कोई अतिरिक्त फायदा तुरंत नहीं मिलता, सिर्फ शेयर की कीमत कम हो जाती है।
जानकारों के मुताबिक, डिविडेंड से निवेशक को नियमित आय मिलती है। बोनस इश्यू से लंबे समय में निवेश बढ़ता है और शेयरों की संख्या ज्यादा हो जाती है। तो वहीं स्टॉक स्प्लिट से शेयर ज्यादा लोगों की पहुंच में आता है और बाजार में उसकी तरलता बढ़ती है।
-आईएएनएस
 

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