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बाजार की पाठशाला : रिटायरमेंट के बाद खत्म होगी पैसों की चिंता! पैसिव इनकम के ये बेस्ट तरीके बनेंगे बुढ़ापे की लाठी 

Source : business.khaskhabar.com | Jan 14, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 market insights end your financial worries after retirement! these best passive income methods will be your support in old age 783942नई दिल्ली । रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है नियमित आमदनी का बंद हो जाना। नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी आती रहती है, लेकिन जैसे ही रिटायरमेंट होती है, खर्चों का बोझ वही रहता है और आय का स्रोत सीमित हो जाता है। ऐसे में अगर पहले से सही योजना न हो, तो फाइनेंशियल दबाव तेजी से बढ़ सकता है। इसी समस्या का सबसे बेहतर समाधान है पैसिव इनकम, जो बिना रोजाना मेहनत किए लंबे समय तक कमाई का जरिया बन सकती है। 
पैसिव इनकम का मतलब ऐसी आमदनी से है, जिसमें बार-बार काम करने की जरूरत नहीं होती। शुरुआत में सही निवेश या प्लानिंग करनी पड़ती है, लेकिन उसके बाद तय समय पर पैसा अपने-आप आता रहता है। किराया, ब्याज, डिविडेंड या पेंशन जैसी इनकम इसी श्रेणी में आती हैं। रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए पैसिव इनकम को बेहद जरूरी माना जाता है।
रिटायर लोगों के लिए सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस) सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में गिनी जाती है। यह पूरी तरह सरकारी गारंटी वाली स्कीम है, जिसमें फिलहाल करीब 8.2 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है। इस स्कीम में अधिकतम 30 लाख रुपए तक निवेश किया जा सकता है और अवधि 5 साल की होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ब्याज हर तीन महीने सीधे बैंक खाते में जमा होता है, जिससे नियमित इनकम बनी रहती है। इसके साथ ही टैक्स से जुड़े कुछ फायदे भी मिलते हैं।
अगर किसी के पास पहले से फ्लैट, मकान या दुकान है, तो उसे किराए पर देना रिटायरमेंट के बाद मजबूत इनकम सोर्स बन सकता है। किराएदार मिलने के बाद हर महीने तय रकम आती रहती है, जिससे रोजमर्रा के खर्च आसानी से पूरे हो जाते हैं। हालांकि, इस विकल्प में लीज एग्रीमेंट सही तरीके से बनवाना और किराएदार की पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी होता है। लंबे समय में प्रॉपर्टी से मिलने वाली आय स्थिर और फायदेमंद साबित हो सकती है।
जो लोग थोड़ा जोखिम उठाने को तैयार हैं, उनके लिए डिविडेंड देने वाले शेयर और म्यूचुअल फंड्स भी पैसिव इनकम का अच्छा जरिया बन सकते हैं। ऐसे निवेशों में समय-समय पर डिविडेंड के रूप में आमदनी मिलती है, साथ ही पूंजी बढ़ने की संभावना भी रहती है। हालांकि, इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है, इसलिए निवेश से पहले मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड वाले विकल्प चुनना जरूरी होता है।
कम जोखिम के साथ हर महीने तय इनकम चाहने वालों के लिए पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (एमआईएस) एक भरोसेमंद विकल्प है। इस स्कीम में सिंगल अकाउंट में 9 लाख रुपए और जॉइंट अकाउंट में 15 लाख रुपए तक निवेश किया जा सकता है। मौजूदा समय में इसमें करीब 7.4 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है, जो हर महीने खाते में आता है। 5 साल की अवधि वाली यह योजना उन लोगों के लिए खास है, जो सुरक्षित निवेश के साथ स्थिर इनकम चाहते हैं।
इसके अलावा, रिटायरमेंट के बाद पेंशन जैसी नियमित आय के लिए एन्युटी प्लान या पेंशन स्कीम भी कारगर साबित होती है। इसमें एकमुश्त रकम निवेश करनी होती है और बदले में जीवनभर हर महीने तय इनकम मिलती रहती है। इनकम की राशि निवेश की रकम और चुने गए प्लान पर निर्भर करती है। जो लोग लंबी अवधि तक बिना किसी झंझट के नियमित पैसा चाहते हैं, उनके लिए यह विकल्प काफी उपयोगी है।
कुल मिलाकर, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक तनाव से बचने के लिए पैसिव इनकम की योजना पहले से बनाना बेहद जरूरी है। सही विकल्पों के चुनाव से न सिर्फ खर्च आसानी से पूरे किए जा सकते हैं, बल्कि बुढ़ापे में आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बनी रहती है।
--आईएएनएस
 

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