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यूएई के बजाय अब अमेरिका से सोना-चांदी का आयात बढ़ाएगा भारत

Source : business.khaskhabar.com | Feb 17, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 india will now increase gold and silver imports from the us instead of the uae 792500नई दिल्ली । भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पहले ही अमेरिका से तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। अब सरकार की योजना कीमती धातुओं के आयात में भी बदलाव करने की है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत अब यूएई के बजाय अमेरिका से अधिक सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहा है। 
इस कदम से सोना-चांदी की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है और अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन (ट्रेड सरप्लस) भी कम हो सकता है।
अमेरिका सोना और चांदी के व्यापार का एक बड़ा वैश्विक केंद्र है। वह सोना (जिसमें स्क्रैप और वेस्ट भी शामिल है) और चांदी का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका कनाडा, भारत और ब्रिटेन जैसे देशों को अरबों डॉलर की कीमती धातुएं निर्यात करता है। इन निर्यातों में कच्चा, परिष्कृत और आभूषण रूप में तैयार सोना-चांदी शामिल होता है।
भारत अमेरिका को लगभग 2.8 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि अमेरिका से करीब 1.5 अरब डॉलर का आयात करता है। इस तरह गैर-समुद्री कृषि उत्पादों में भारत को करीब 1.3 अरब डॉलर का व्यापारिक अधिशेष (सरप्लस) हासिल है।
अधिकारी ने बताया कि भारत में आयात होने वाले किसी भी कृषि उत्पाद को जैव-सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा। देश में जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) खाद्य पदार्थों की अनुमति नहीं है। अमेरिका से आयात होने वाले कुछ कृषि उत्पादों पर टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) भी लागू है।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता भारत के डेटा सेंटर उद्योग के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इससे उन्नत तकनीक तक पहुंच, निवेश में वृद्धि और परिचालन लागत में कमी आएगी।
पहले एंटरप्राइज जीपीयू सर्वर पर 20 से 28 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, जिससे भारत में डेटा सेंटर स्थापित करना सिंगापुर जैसे देशों की तुलना में महंगा पड़ता था। अब शुल्क में कटौती से जीपीयू-तैयार डेटा सेंटर स्थापित करने की लागत लगभग 14 प्रतिशत तक कम होने की संभावना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत व्यापक टैरिफ कटौती, कई उत्पाद श्रेणियों में शून्य शुल्क पहुंच, डिजिटल और तकनीकी सहयोग में वृद्धि तथा किसानों, एमएसएमई और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए संतुलित ढांचा तैयार किया गया है।
साल 2024 में अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 86.35 अरब डॉलर रहा। इस समझौते से टेक्सटाइल, लेदर, रत्न एवं आभूषण, कृषि, मशीनरी, होम डेकोर, फार्मास्यूटिकल और टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा।
समझौते के तहत 30.94 अरब डॉलर के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं 10.03 अरब डॉलर के निर्यात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे बड़ी मात्रा में भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में कम शुल्क या पूरी तरह शुल्क-मुक्त पहुंच के साथ प्रवेश कर सकेंगे, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता काफी बढ़ेगी।
--आईएएनएस
 

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